Supreme Court ने लॉ सेक्रेटरी को भेजा नोटिस, कहा- कॉलेजियम की सिफारिशों को होल्ड पर रखना स्वीकार्य नहीं
Supreme Court, सुप्रीम कोर्ट जजों की नियुक्ति को लेकर कॉलेजियम की सिफारिशों को लटकाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय विधि मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है। केंद्रीय विधि मंत्रालय के सचिव से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, कॉलेजियम की तरफ से नाम दोबारा भेजे जाने के बाद नियुक्ति होनी ही चाहिए। सरकार इस तरह से नामों को रोके नहीं रह सकती है।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और अभय श्रीनिवास ओका की पीठ ने केंद्र के खिलाफ कॉलेजियम द्वारा अनुमोदित नामों को वापस लेने के खिलाफ कड़ी आलोचनात्मक टिप्पणी की। पीठ सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए 11 नामों को लेकर एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर विचार कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेजियम द्वारा दोबारा भेजे गए 11 नामों को केंद्र ने फाइलों को लंबित रखा और अनुमोदन को रोकने की ऐसी प्रथा "अस्वीकार्य" है। बेंच ने कहा, उच्च न्यायालयों में नियुक्तियों में महत्वपूर्ण देरी ने इस न्यायालय को 2021 में आदेश पारित करने के लिए बाध्य किया, जिसमें एक व्यापक समयरेखा प्रदान करने की मांग की गई जिसमें प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि, अगर इस प्रक्रिया में और देरी होती है तो यह बार के सदस्यों की बेंच में पदोन्नति की प्रक्रिया को स्वीकार करने में देरी करती है। छह महीने पहले नाम भेजने की समय अवधि की कल्पना इस सिद्धांत पर की गई थी कि समान समय अवधि पर्याप्त होगी। कोर्ट ने कहा कि नामों को मंजूरी देने में देरी से जिन वकीलों की पदोन्नति की सिफारिश की गई है, वे अपना नाम वापस लेने के लिए प्रेरित होते हैं, इस प्रकार न्यायपालिका को उनकी विशेषज्ञता से वंचित किया जाता।












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