अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जो बाबर ने किया वो ठीक नहीं कर सकते
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अयोध्या मामले को लेकर सुनवाई हुई। इस सुनवाई में कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि कोर्ट चाहता है कि आपसी बातचीत से इसका हल निकले। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई जो पांच जजों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे उन्होंने कहा कि हम जल्द ही इस पर फैसला लेंगे। हालांकि कोर्ट ने कोई तारीख तय नहीं की। 26 फरवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने मध्यस्थता के माध्यम से इस मामले में एक सौहार्दपूर्ण हल का सुझाव दिया था और 6 मार्च के लिए अपना आदेश सुरक्षित रखा था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ कर रही है।
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'बाबर ने क्या किया उसकी चिंता नहीं'
अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने कहा कि हमें इसकी चिंता नहीं कि मुगल शासक बाबर ने क्या किया, उसके बाद क्या हुआ। हम वर्तमान हालात पर बात कर रहे हैं। बोबडे ने कहा कि यह भावनाओं के बारे में है, धर्म के बारे में है और विश्वास के बारे में है। हम विवाद की गंभीरता के प्रति सचेत हैं। यहां मध्यस्थ होने की जरूरत नहीं है, लेकिन मध्यस्थों का एक पैनल है। जब मध्यस्थता चालू होती है, तो उस पर रिपोर्ट नहीं की जानी चाहिए। इस पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन मध्यस्थता प्रक्रिया शुरू होने पर किसी भी मकसद को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

मुस्लिम पक्ष और निर्मोही अखाड़ा मध्यस्था को तैयार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जहां मुस्लिम पक्ष और हिंदू पक्ष की तरफ से निर्मोही अखाड़ा मध्यस्थता के लिए तैयार दिखा। वहीं हिंदू महासभा और रामलला पक्ष ने इस पर सवाल उठा। हिंदू महासभा के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता का विरोध किया था और कहा था कि इस प्रकार की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं जो हर बार नाकाम रही है। लेकिन बाबरी मस्जिद पक्ष ने मध्यस्थता पर चिंता तो जताई थी, लेकिन ये भी कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी करती है तो वह तैयार हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट के साल 2010 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 14 अपील दायर की गई हैं। हाई कोर्ट ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन हिस्सों में सुन्नी वक्फ बोर्ड, राम लला और निर्मोही अखाड़े के बीच बांटने का आदेश दिया था। इस मुद्दे से संबंधित कई अन्य अपील भी अदालत में दायर की गई थी।
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