'जैसा कि हम पर आरोप लग रहे हैं', बंगाल में राष्ट्रपति शासन की याचिका पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Supreme Court News: 'पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन' और 'अर्धसैनिक बलों की तैनाती' की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 21 अप्रैल को बड़ी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अतिक्रमण के आरोपों और कुछ भाजपा नेताओं द्वारा विवादास्पद टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है। जस्टिस बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा, ''आप (याचिकाकर्ता) चाहते हैं कि हम इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति को रिट जारी करें? वैसे भी, हम पर कार्यपालिका (क्षेत्र) में अतिक्रमण करने के आरोप लग रहे हैं, हम आरोपों का सामना कर रहे हैं।''

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जारी हिंसा के बीच राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग हो रही है। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग वाली याचिका वकील विष्णु शंकर जैन ने दायर की थी। विष्णु जैन का कहना है कि पश्चिम बंगाल में पैरा मिलेट्री फोर्स की तत्काल तैनाती की जरूरत है। इसको लेकर एक और याचिका सुप्रीम कोर्ट में वकील शशांक शेखर झा की ओर से दायर की गई है। शशांक शेखर झा ने अपनी याचिका में मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी के गठन की मांग की है।

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सुप्रीम कोर्ट ने आखिर 'किन आरोपों' पर दी प्रतिक्रिया?

सुप्रीम कोर्ट पिछले अपने दो अहम फैसलों को लेकर आलोचना का शिकार हुई है, एक- राज्यपालों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति के लिए समयसीमा निर्धारित करना, दूसरा- संशोधित वक्फ अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाने के लिए। खुद भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि देश में गृहयुद्ध कराने के लिए चीफ जस्टिस संजीव खन्ना जिम्मेदार हैं। उन्होंने इतना तक कह दिया था कि अगर संसद के बनाए कानून पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा सकता है तो संसद को बंद कर देना चाहिए।

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निशिकांत दुबे के अलावा उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा था कि ''सुप्रीम कोर्ट लोकतांत्रिक ताकतों पर 'परमाणु मिसाइल' नहीं दाग सकता।'' उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री, भाजपा नेता दिनेश शर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि कोई भी संसद या राष्ट्रपति को निर्देश नहीं दे सकता।

इन आलोचनाओं के बीच सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी अहम है कि हम पर कार्यपालिका में अतिक्रमण करने के आरोप लग रहे हैं। यह टिप्पणी इसलिए अहम है क्योंकि जस्टिस बीआर गवई, जो अगले महीने चीफ जस्टिस का पदभार संभालेंगे, संभवतः वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाओं पर विचार करेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला, जिसको लेकर लगे न्यायिक अतिक्रमण के आरोप

इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए तमिलनाडु के 10 विधेयक पारित किए, जो कई महीनों से राज्यपाल के पास लंबित थे। इसने पहली बार यह भी निर्देश दिया कि राष्ट्रपति को राज्यपालों द्वारा भेजे गए विधेयकों पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना चाहिए।

यह फैसला सत्तारूढ़ भाजपा के कई नेताओं और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पसंद नहीं आया, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करने का आरोप लगाया है।

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