Supreme Court Row: संसद Vs न्यायपालिका पर गरमाई सियासत! निशिकांत दुबे ने क्यों कहा संसद बंद कर देना चाहिए?
Supreme Court Row: बीजेपी के फायर बिग्रेड सांसद और झारखंड के गोड्डा से लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने विवाद खड़ा कर दिया है।
अपने बयानों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाले निशिकांत दुबे ने अब सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला किया है। दरअसल कुछ दिन पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर बड़ा सवाल उठाया था। इसके बाद से ही देश में सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को लेकर बहस जारी है।

निशिकांत दुबे ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति की शक्तियों को लेकर जारी बहस के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए लिखा कि, 'क़ानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन बंद कर देना चाहिये'। निशिकांत दुबे का ये बयान काफी चर्चा में है।
उपराष्ट्रपति ने न्यायपालिका को लेकर तीखी टिप्पणी की थी
बता दें कि, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार (17 अप्रैल) को न्यायपालिका को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि, लोकतंत्र में ऐसी स्थिति नहीं हो सकती जहां अदालतें राष्ट्रपति को निर्देश दें। राज्यसभा के प्रशिक्षुओं के छठे बैच को संबोधित करते हुए धनखड़ ने दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के आवास से भारी मात्रा में नकदी बरामद होने के बारे में विस्तार से बात की और विवाद पर न्यायपालिका की प्रतिक्रिया की आलोचना की थी।
न्यायपालिका कानून बना रही है- जगदीप धनखड़
उन्होंने आगे कहा था कि, 'अनुच्छेद 142 लोकतांत्रिक ताकतों के खिलाफ परमाणु मिसाइल बन गया है। न्यायाधीश और न्यायपालिका अब कानून बना रही है, कार्यकारी कार्य कर रही है, सुपर-संसद के रूप में कार्य कर रही है। जबकि उन पर कोई जवाबदेही नहीं है।'
'हम ऐसी स्थिति नहीं बना सकते हैं जहां आप भारत के राष्ट्रपति को निर्देश दें, और किस आधार पर? संविधान के तहत आपके पास एकमात्र अधिकार अनुच्छेद 145 (3) के तहत संविधान की व्याख्या करना है। वहां, पांच न्यायाधीश या उससे अधिक होने चाहिए।'
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जगदीप धनखड़ का बयान देखकर दुखी और हैरान हुआ- सिब्बल
वहीं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान के बाद देश भर में इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई। इस मामले पर वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा, 'मैं जगदीप धनखड़ का बयान देखकर दुखी और हैरान हुआ।'
'आज के समय में अगर देश में किसी संस्था पर सबसे ज़्यादा भरोसा है, तो वह न्यायपालिका है। जब सरकार के कुछ लोगों को अदालत के फ़ैसले पसंद नहीं आते, तो वे उस पर अपनी सीमा लांघने का आरोप लगाने लगते हैं।'
राष्ट्रपति केवल एक नाममात्र का प्रमुख होता है- कपिल सिब्बल
उन्होंने आगे कहा कि, क्या उन्हें पता नहीं कि संविधान ने अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय देने का अधिकार दिया है?राष्ट्रपति केवल एक नाममात्र का प्रमुख होता है राष्ट्रपति कैबिनेट की सलाह और अधिकार पर काम करते हैं। उनके पास कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं होता। जगदीप धनखड़ को यह जानना चाहिए।'
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