सुप्रीम कोर्ट का 'इलेक्टोरल बॉन्ड' की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित, ECI को दो हफ्ते में डेटा देने का निर्देश
Electoral Bond Scheme: सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने राजनीतिक पार्टियों को चंदे के लिए साल 2018 में लाई गई 'इलेक्टोरल बॉंन्ड' योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार की चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, यह योजना राजनीतिक दलों को गुमनाम फंडिंग की अनुमति देती है।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर तक का चुनावी बॉन्ड के माध्यम से सभी राजनीतिक दलों द्वारा प्राप्त फंड का अपडेट डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई को दो हफ्ते के भीतर एक सीलबंद पैकेट में डेटा देने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बॉन्ड योजना को चुनौती देने वाले वकील वरुण ठाकुर ने कहा कि "चुनावी बॉन्ड योजना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को चुनावी बांड के माध्यम से आए सभी डोनेशन के डेटा का खुलासा करने का निर्देश दिया है।"
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को कहा था कि इलेक्टोरल बॉंन्ड योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब पांच न्यायाधीशों की पीठ फैसला करेगी।
बता दें कि चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ चार याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करने वाली है। इनमें कांग्रेस नेता जया ठाकुर और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की याचिकाएं शामिल हैं। बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा हैं।












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