कथित आतंकी का शव कब्र से वापस निकालकर देने की याचिका को SC ने किया खारिज
नई दिल्ली, 12 सितंबर। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर स्थित हैदरपोरा में पिछले साल नवंबर माह में आमिर मागरे को सुरक्षार्मियों ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। आमिर मागरे की मौत के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार प्रशासन की ओर से किया गया था। लेकिन बाद में मागरे के पिता ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट में याचिका दायर करके अपने बेटे का शव वापस दिए जाने की मांग की थी ताकि वह उसका मजहबी रस्मों के साथ अंतिम संस्कार कर सके। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शव को परिजनों को देने को कहा था, साथ ही कहा था कि अगर शव वापस दिए जाने की स्थिति में नहीं है तो 5 लाख रुपए का मुआवजा परिजनों को दिया जाए। जिसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि शव बाहर निकालने की स्थिति में नहीं है। प्रदेश सरकार के तर्क को कोर्ट ने सही माना था। जिसके बाद परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन परिजनों की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने शव को परिजनों को देने से इनकार कर दिया है।

जस्टिस सूर्यकांत और जेबी पादरीवाला की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार परिवार को 5 लाख रुपए का मुआवजा दें, साथ ही परिवार को इस बात की अनुमति भी दें कि वह कब्र पर फातिहा पढ़ सके जहां पर शव को दफनाया गया है। जस्टिस पादरीवाला ने कहा कि शव को दफनाए जाने के बाद ऐसा माना जाता है कि यह अब कानून के अधिकार में हैं। शव को दफनाए जाने के बाद उसे तबतक बाहर नहीं निकाला जा सकता है जबतक यह न्याय की मांग के लिए ना हो।
कोर्ट ने कहा कि बतौर कोर्ट हम याचिकाकर्ता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन कोर्ट भावनाओं के आधार पर लोगों के अधिकार को तय नहीं कर सकता है, इसे कानून के आधार पर तय करना होता है। कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आगे इस तरह की किसी भी याचिका को खारिज कर दिया है।












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