सुप्रीम कोर्ट पहुंचा 'जहांगीरपुरी अतिक्रमण हटाओ अभियान' का मामला, यथास्थिति बनाए रखने के आदेश
नई दिल्ली, 20 अप्रैल: राजधानी के जहांगीरपुरी में हुई हिंसा के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया है। जिसके तहत सड़क किनारे हुए अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जा रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने भी इलाके में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की थी। इस दौरान मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां से नगर निगम को मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट में अभी तक दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। जिसमें पहली याचिका यूपी, एमपी समेत देश के अन्य राज्यों को लेकर है, जहां हिंसा की घटना के बाद कई लोगों के घर, दुकानों आदि पर बुलडोजर चला। इसके अलावा दूसरी याचिका जहांगीरपुरी में एमसीडी के खिलाफ दायर की गई है। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जहांगीरपुरी में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया यानि अभी कुछ दिनों तक वहां बुलडोजर पर ब्रेक लगा रहेगा।
मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना के समक्ष नगर निगम की खामियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि जहांगीरपुरी में जहां दंगे हुए थे, वहां असंवैधानिक, अनधिकृत रूप से तोड़फोड़ की जा रही है। कोई नोटिस नहीं दिया गया ताकि 10 दिनों में जवाब दिया जा सके। वहीं दूसरी ओर जमीयत उलमा-ए-हिंद ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें केंद्र और राज्यों को निर्देश देने की मांग की गई, ताकि दंडात्मक कार्रवाई के रूप में किसी भी आवासीय आवास या वाणिज्यिक संपत्ति को ध्वस्त ना किया जाए। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। जिस पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
एमसीडी ने दी सफाई
वहीं एमसीडी ने साफ कहा कि इस अभियान का हिंसा से कोई लेना देना नहीं है। वो ऐसी कार्रवाई करती रहती है। बीते 11 अप्रैल को भी ऐसा एक्शन लिया गया था। इस बार उनको ज्यादा पुलिस बल की जरूरत लगी, जिस वजह से दिल्ली पुलिस से मदद मांगी गई है।












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