असम में परिसीमन के लिए विपक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, केंद्र से मांगा जवाब
असम में परिसीमन पर विपक्ष की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
असम के 126 विधानसभा क्षेत्रों और 14 लोकसभा क्षेत्रों के परिसीमन के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के हालिया मसौदा प्रस्ताव को चुनौती देने वाली असम के विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने असम में शुरू की गई चुनाव आयोग की परिसीमन प्रक्रिया पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया है। साथ ही कहा कि वो राज्य में परिसीमन अभ्यास के संबंध में कोई और कदम उठाने के लिए चुनाव आयोग को रोकने वाला कोई आदेश जारी नहीं करेगा।

चुनाव आयोग के प्रस्ताव में असम में एसटी के लिए 19 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटें आरक्षित रखी गई हैं। जबकि, एससी के लिए 9 विधानसभा और एक संसदीय सीट आरक्षित रखी गई है।
भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाली और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर जब जून 2023 में मसौदा प्रस्ताव जारी करने को ध्यान में रखते हुए परिसीमन शुरू हो गया है, तो प्रक्रिया में बाधा डालना उचित नहीं होगा।
हालांकि, पीठ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 8ए की संवैधानिक वैधता की जांच करने के लिए सहमत हुई जो चुनाव आयोग को निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य करने का अधिकार देती है। शीर्ष अदालत ने याचिकाओं पर केंद्र और चुनाव आयोग से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता उसके दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने असम में परिसीमन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया था, हालांकि फरवरी 2020 में कानून मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की कि स्थिति सामान्य थी, इसलिए राष्ट्रपति ने पहले की अधिसूचना को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि राष्ट्रपति को लगता है कि इन राज्यों में स्थिति परिसीमन अधिनियम में पारित स्थगन आदेश को रद्द किया जा सकता है ताकि प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
इस पर याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि असम में 126 विधानसभा और 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा को फिर से समायोजित करने के लिए चुनाव पैनल द्वारा की गई पूरी कवायद असम के लिए भेदभावपूर्ण होने के अलावा मनमानी और अपारदर्शी है। 20 जून को चुनाव आयोग मे असम में 126 विधानसभा और 14 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा को फिर से समायोजित करने पर एक मसौदा आदेश जारी किया है।












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