'राज्य 'औद्योगिक शराब' पर फैसला दे सकते हैं', सुप्रीम कोर्ट ने पलटा 34 साल पुराना फैसला
Supreme Court on Industrial Liquor: सर्वोच्च न्यायालय ने औद्योगिक शराब को लेकर अहम फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसला में कहा है कि राज्य सरकारें 'औद्योगिक शराब' पर कानून बना सकती हैं, जिसे 'विकृत स्प्रिट' भी कहा जाता है। औद्योगिक अल्कोहल आमतौर पर आइसोप्रोपिल अल्कोहल (आइसोप्रोपेनॉल) या विकृत अल्कोहल (एडिटिव्स के साथ इथेनॉल) होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है इंडस्ट्रियल अल्कोहल का मसला केंद्र से ज्यादा राज्य सरकारों का है, लिहाजा वो इस पर कानून बनाने का अधिकार रखती हैं। कोर्ट ने कहा कि इसे राज्य सूची में 'नशीली शराब' शब्द के अंतर्गत शामिल करके, यानी उन विषयों की सूची जिस पर राज्य कानून पारित कर सकते हैं।

34 साल पुराना फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्यों को इसे राज्य सूची में 'नशीली शराब' के अंतर्गत शामिल करने की अनुमति देता है, जिसमें उन विषयों की रूपरेखा दी गई है, जिन पर राज्य कानून पारित कर सकते हैं। इस फैसले ने सिंथेटिक्स एंड केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सात न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए 34 साल पुराने फैसले को पलट दिया है।
संविधान पीठ ने 8:1 के बहुमत से किया फैसला
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ के 8 न्यायाधीशों ने राज्यों की याचिका का समर्थन किया। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बंगाल और केरल शामिल थे। हालांकि, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने इस पर असहमति जताई। 8:1 के बहुमत ने निष्कर्ष निकाला कि 'नशीली शराब' में अल्कोहल युक्त सभी तरल पदार्थ शामिल हैं, यहां तक कि वे भी जो मानव उपभोग के लिए नहीं हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राज्यों की विधायी शक्ति को चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि कानून 'मादक' और 'औद्योगिक' दोनों उत्पादों से संबंधित है। संघ इस विषय पर नियंत्रण नहीं कर सकता। यह निर्णय पिछली व्याख्या को चुनौती देता है, जिसमें 'मादक शराब' को मानव उपभोग के लिए उपयुक्त पेय पदार्थों तक सीमित किया गया था।
न्यायमूर्ति नागरत्ना इस व्याख्या से असहमत थीं। उन्होंने तर्क दिया कि 'औद्योगिक शराब', मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त होने के कारण, राज्य के अधिकार क्षेत्र में नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिंथेटिक्स मामले में न्यायालय द्वारा पहले 'सही निर्णय' लिया गया था।
फैसला रख लिया गया था सुरक्षित
अप्रैल में छह दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। इस सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि अगर 'औद्योगिक शराब' पर नियामक शक्ति केंद्र के पास चली गई, तो इससे ऐसी शराब की अवैध खपत को रोकने की उनकी क्षमता में बाधा आएगी।
न्यायमूर्ति नागरत्ना की असहमति ने इस तर्क का प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि संभावित अवैध खपत 'औद्योगिक शराब' पर राज्य के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने का औचित्य नहीं देती है। इस बीच, केंद्र ने 'औद्योगिक शराब' को विनियमित करने के अपने दीर्घकालिक अधिकार को बनाए रखा।
ये भी पढ़ें: बहराइच हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट को उत्तर प्रदेश सरकार ने दिया आश्वासन, 23 अक्टूबर तक नहीं होगा विध्वंस
न्यायालय को यह निर्धारित करने का कार्य सौंपा गया था कि क्या उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (आईआरडीए) 1951 संघ सरकार को 'औद्योगिक शराब' पर कानून बनाने की अनुमति देता है। दो मुख्य प्रश्नों पर विचार किया गया: क्या 'औद्योगिक शराब' को 'नशीली शराब' के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए, इस प्रकार यह राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है? और क्या राज्य इसे नियंत्रित कर सकते हैं जैसा कि वे अन्य मादक पदार्थों के साथ करते हैं?
आईआरडीए की धारा 18जी केंद्र सरकार को अनुसूचित सूचियों में सूचीबद्ध उद्योगों से उत्पादों का उचित वितरण और मूल्य निर्धारण सुनिश्चित करने की अनुमति देती है। चुनौती समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 पर केंद्रित थी, जो राज्यों को 'औद्योगिक शराब' के व्यापार, उत्पादन और वितरण पर अधिकार देती है। इसके अतिरिक्त, दूसरी सूची की प्रविष्टि 8 राज्यों को मादक शराब के सभी पहलुओं को विनियमित करने का अधिकार देती है।
ये भी पढ़ें: 'प्रदूषण पर सरकारें सख्त क्यों नहीं', पॉल्यूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पराली जलाने के मुद्दे पर लगाई फटकार
पीठ में जस्टिस हृषिकेश रॉय, अभय एस ओका, जेबी पारदीवाला, मनोज मिश्रा, उज्जल भुयान, सतीश चंद्र शर्मा और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। उनके सामूहिक फैसले से राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर औद्योगिक शराब के कानून बनाने के तरीके में अहम बदलाव आया है।
-
Vrindavan: 'अब बोट वापस ले चलो', नाविक की एक गलती और छिन गईं 10 जिंदगियां, सामने आई हादसे की असली वजह -
Iran Vs America: शांति वार्ता में 'लात-घूंसे', तुर्किए मीडिया का दावा, क्यों भिड़े ईरानी मंत्री- ट्रंप के दूत -
MI vs RCB: विराट कोहली ने मुंबई में रच दिया इतिहास, दुनिया में पहली बार हुआ अनोखा कारनामा -
Asha Bhosle Last Post: 'मैं विलीन हो जाऊंगी', निधन से पहले ही आशा ताई ने लिख दिया था 'आखिरी सच' -
MI vs RCB: वानखेड़े में पसरा सन्नाटा, रोहित शर्मा लाइव मैच से बैटिंग छोड़ गए, आखिर क्या है कारण -
Asha Bhosle Net Worth: आशा भोसले कितनी छोड़ गईं प्रॉपर्टी? सिगिंग के अलावा कहां से करती थींं करोड़ों की कमाई -
Bihar Next CM: इन 5 नेताओं में से ही कोई एक बनेगा बिहार का नया मुख्यमंत्री! कौन हैं ये और क्या है इनकी जाति? -
Asha Bhosle Last Wish: अधूरी रह गई आशा भोसले की अंतिम इच्छा, पॉडकास्ट में बताया था क्या थी स्पेशल ख्वाहिश -
'मैं आखिरी जिंदा मुगल हूं', मंगेशकर परिवार में जन्मीं आशा भोसले ने कब और क्यों कही थी ये बात? -
Asha Bhosle का 92 साल की उम्र में हुआ निधन, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में दिग्गज सिंगर ने ली आखिरी सांस -
Asha Bhosle: 'बेइंतहा खूबसूरत', कौन हैं जनाई भोसले? क्रिकेटर सिराज से उड़ी थीं अफेयर की खबरें -
SRH vs PBKS: पंजाब किंग्स टीम ने हैदराबाद के खिलाफ मैच में क्यों पहनी काली पट्टी? दुखद घटना कर देगी भावुक












Click it and Unblock the Notifications