सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर पंजाब-हरियाणा सरकार पर जताई नाराजगी, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण संकट के लिए पंजाब और हरियाणा की सरकारों की आलोचना की है। अदालत ने पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों की अनदेखी पर निराशा जताई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर आया है। जब ठंड के महीनों के दौरान वायु प्रदूषण गंभीर रूप से बढ़ जाता है। खासकर दिवाली के आस-पास के समय।

बढ़ते प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान

दिल्ली की वायु गुणवत्ता, जो पंजाब और हरियाणा में धान के खेतों से पराली जलाने के कारण और भी खराब हो जाती है। वाहनों के उत्सर्जन और धूल जैसे स्थानीय प्रदूषकों से और भी जटिल हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की ओर से इस गंभीर समस्या का समाधान करने में निर्णायक कदमों की कमी पर नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि पराली जलाने की समस्या पर पंजाब और हरियाणा द्वारा कोई ठोस उपाय न किए जाने के कारण प्रदूषण की स्थिति और भी बिगड़ गई है।

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हरियाणा के मुख्य सचिव को किया तलब

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के पैनल की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह पैनल अपने आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करने में असमर्थ रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने हरियाणा के मुख्य सचिव को 23 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एएस ओका ने कहा कि हरियाणा द्वारा दिया गया हलफनामा गैर-अनुपालन से भरा हुआ है। हम आयोग को राज्य के अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं। मुख्य सचिव को न केवल गैर-अनुपालन के लिए बल्कि उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न करने के लिए भी अदालत को स्पष्टीकरण देना होगा।

दिल्ली सरकार का बायो-डीकंपोजर समाधान

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने पराली को खाद में बदलने के लिए एक बायो-डीकंपोजर समाधान की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष जलाने के बजाय एक व्यवहार्य विकल्प प्रदान करना है। जिससे वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित किया जा सके। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से सर्दियों के महीनों में प्रदूषण के स्रोत को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता

एनसीआर में वायु प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए राज्य सरकारों, केंद्र सरकार और विभिन्न संस्थाओं के बीच ठोस सहयोग और सख्त उपायों की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में हस्तक्षेप ने राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है और पराली जलाने के पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है। न्यायालय ने हरियाणा के मुख्य सचिव की उपस्थिति और गैर-अनुपालन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट का इंतजार करते हुए आशा जताई है कि इस गंभीर समस्या का जल्द ही कोई ठोस समाधान निकाला जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से उम्मीद की जा रही है कि पराली जलाने के मामलों में कमी आएगी और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस उपाय किए जाएंगे।

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