ऑफलाइन बोर्ड परीक्षा रद्द करने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज
नई दिल्ली, 23 फरवरी: कोरोना महामारी के रोजाना केस अब काफी हद तक कम हो गए हैं। जिस वजह से कई राज्यों ने स्कूलों को फिर से खोल दिया है। साथ ही स्टेट बोर्ड्स, सीबीएसई, आईसीएसई और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा करवाने की तैयारी कर रहे। ऑफलाइन बोर्ड एग्जाम्स को चुनौती देते हुए एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। जिसे सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया। साथ ही इस मुद्दे पर सख्त टिप्पणी की है।
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दरअसल कोरोना का हवाला देते हुए कुछ छात्र ऑफलाइन एग्जाम का विरोध कर रहे थे। वो चाहते थे कि आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर ही रिजल्ट आए। जब सरकार और परीक्षा करवाने वाले बोर्ड्स ने उनकी नहीं सुनी, तो बाल अधिकार कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। साथ ही 10वीं और 12वीं की ऑफलाइन बोर्ड परीक्षा रद्द करने की मांग की। इस पर कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। सर्वोच्च अदालत का कहना है कि इस तरह की याचिकाएं भ्रामक हैं और छात्रों को झूठी उम्मीद देती हैं। ऐसे में इसका फैसला बोर्ड पर छोड़ दें।
मामले में जस्टिस खानविलकर ने कहा कि हर जगह ये न्यूज है कि बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की जा रही हैं। इसका प्रचार किया जा रहा है। इसे रोकना होगा। छात्रों और अधिकारियों को उनका काम करने दें। इस तरह आप जनहित याचिका नहीं दायर कर सकते। ये टिप्पणी उसके लिए जिसने याचिका दायर की है।
पिछले साल नहीं हुए थे एग्जाम
जानकारी के मुताबिक बाल अधिकार कार्यकर्ता अनुभा श्रीवास्तव सहाय ने बोर्ड परीक्षा 2022 को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। वो चाहते थे सुप्रीम कोर्ट स्टेट बोर्ड्स, सीबीएसई, सीआईएससीई, एनआईओएस को परीक्षा रद्द करने का आदेश दे। पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से बच्चों को आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर ही पास कर दिया गया था।












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