सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को लगाई लताड़, पूछा-क्‍यों नहीं हो रही जजों की नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जजों की नियुक्ति को अटकाया नहीं जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती है।

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने नरेंद्र मोदी सरकार को लताड़ लगाते हुए पूछा कि आखिर कोलिजियम की सिफारिशों के बाद जजों की नियुक्ति क्‍यों नही की जा रही है।

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जजों की नियुक्ति को अटकाया नहीं जाना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जजों की नियुक्ति को अटकाया नहीं जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती है और इस सवैंधानिक संस्‍था के काम-काज को रोक नहीं सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने वायदा किया था कि वो बिना एमओपी के ही जजों की नियुक्ति करेगी। कोर्ट ने कहा कि एमओपी का जजों की नियुक्ति से कुछ लेना-देना नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश पहले भी हो चुके नाराज

आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर पहले भी मुख्‍य न्‍यायाधीश टीएस ठाकुर मोदी सरकार की आलोचना कर चुके हैं। देश की आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर लाल किले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण से भारत के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर नाराज दिख थे।

स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरन उन्होंने कहा था कि 'मैं पीएम मोदी और कानून मंत्री दोनों का भाषण सुना है। मैं यह उम्मीद कर रहा था कि न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर कुछ कहा जाएगा।' उन्होंने आगे कहा कि ' मैं सोचता हूं कि मैं अपने करियर के शिखर पर पहुंच चुका हूं, इसलिए मैं जो भी महसूस करता हूं उसे कहने में हिचकता नहीं हूं।'

रो दिए थे चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर

टीएस ठाकुर ने कहा था कि 'पीएम मोदी के भाषण से मैं निराश हूं। मैं अनुरोध करता हूं कि सरकार न्यायपालिका की तकलीफ पर ध्यान दें, विशेष तौर पर न्यायाधीश की नियुक्ति पर।' गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में राज्यों के मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की एक बैठक में जब वो बोल रहे थे तो उस दौरान न्यायपालिका की समस्याओं की बात करते हुए वो रो पड़े थे।

उन्होंने कहा था कि 'हम चाहते हैं कि लोग भारत आएं और मेक इन इंडिया का हिस्सा बनें। निवेश करें लेकिन जिन लोगों को हम बुला रहे हैं वो यह भी देखेंगे कि निवेश के मामले में पैदा होने वाले विवादों से निपटने के लिए न्यायपालिका कितनी सक्षम है।'

न्यायाधीश की नियुक्ति पर भावुक होते हुए ठाकुर ने कहा था कि 'ये केवल बेचारे याची और जेल में पड़े हुए लोगों के लिए ही नहीं है वरन् देश के विकास के लिए जरूरी है।' ठाकुर ने यह भी कहा था कि ' केवल आलोचना करने भर से काम नहीं होगा, आप सारा बोझ न्यायपालिका पर नहीं डाल सकते, अगर भारत के न्यायाधीश के काम की तुलना अन्य देशों से करेंगे , तो हम बहुत आगे हैं।

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