जजों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक, नहीं लग पाई किसी नाम पर मुहर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर गुरुवार को कॉलेजियम की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायधीश एसए बोबडे ने की। इस दौरान नई नियुक्ति के लिए कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। इस बैठक में जस्टिस बोबडे के अलावा जस्टिस एनवी रमना समेत पांच वरिष्ठ जज भी मौजूद थे।

जानकारी के मुताबिक जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस आर. एफ. नरीमन, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिएम खानविलकर ने गुरुवार दोपहर बैठक की, लेकिन किसी का नाम नहीं तय हुआ। वहीं चीफ जस्टिस बोबडे 24 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं, ऐसे में उनकी जगह नूतलपति वेंकट रमना जिम्मेदारी संभालेंगे। राष्ट्रपति ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है, जिस वजह से निवर्तमान चीफ जस्टिस किसी नाम की अनुशंसा नहीं कर सकते। इसी वजह से कॉलेजियम ने सरकार को कोई नाम नहीं सौंपा।
कितने पद हैं खाली?
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 है। 17 नवंबर 2019 को सीजेआई रंजन गोगोई रिटायर हुए थे। उनके अलावा चार अन्य जजों ने भी अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, ऐसे में कुल रिक्त पदों की संख्या पांच है। वहीं जब से सीजेआई बोबडे ने कार्यभार संभाला है, तब से कॉलेजियम ने किसी भी जज के लिए अनुशंसा नहीं की है।
बैठक पर उठाए गए थे सवाल
बैठक की खबर मिलते ही सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उस पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जब राष्ट्रपति ने नए नाम का ऐलान कर दिया है, तो जस्टिस बोबडे किसी भी नाम की सिफारिस नहीं कर सकते हैं। इस पूरे मामले में पूर्व सीजेआई आर एम लोढ़ा ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि निवर्तमान सीजेआई अपने कार्यकाल के अंत में सिफारिशें नहीं कर सकता, ये इस बात पर निर्भर करता है कि वो अपने सहयोगियों को कैसे विश्वास में लेते हैं।












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