'सोशल मीडिया पर जजों की फनी क्लिप वायरल होती हैं', लाइव स्ट्रीमिंग पर CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने दी नसीहत
ओडिशा के कटक में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI ने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान जज बोलते वक्त अपना ध्यान रखें। सोशल मीडिया पर जजों के फनी कमेंट वायरल होते हैं। ऐसे में हमें सीखने की जरूरत है।

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को ज्यूडिशियल में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के यूज करने पर सलाह दी। उन्होंने न्यायाधीशों से हाइब्रिड सुनवाई जारी रखने के लिए कहा। साथ ही सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर सीजेआई ने कहा कि हमें सीखने की जरूरत है।
ओडिशा के कटक में डिजिटाइजेशन, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल प्रोग्राम पर दो दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें भारत भर के वकीलों से बहुत सारी जनहित याचिकाएं (PIL) मिलती हैं कि हाइब्रिड सुनवाई बंद कर दी गई है और एक संसदीय स्थायी समिति ने पाया है कि उच्च न्यायालयों में स्थापित टेक्नोलॉजी इंस्फ्रास्टर चलन में नहीं था।
कार्यक्रम में सीजेआई ने कहा, "मैं मुख्य न्यायाधीशों से अपील करूंगा कि कृपया उस इंस्फ्रास्टर और टेक्नोलॉजी को भंग ना करें। यह कोरोना महामारी तक ही सीमित नहीं था। यह कोविड और उससे आगे के लिए था।" इसी के साथ उन्होंने आगे कहा कि एआई टूल्स उपयोगी होंगे, क्योंकि सजा सुनाने के लिए न्यायाधीशों का विवेक आवश्यक होगा।
वहीं सीजेआई ने अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का जिक्र करते हुए कहा कि आज ज्यादातर हाईकोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे हैं। यूट्यूब पर एक क्लिप है जिसमें पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एक आईएएस अधिकारी से पूछते हैं कि उसने उचित कपड़े क्यों नहीं पहने थे और गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने एक वकील से पूछा कि वह अपने मामले के लिए तैयार क्यों नहीं है?
उन्होंने कहा कि YouTube पर हाई कोर्ट की कार्यवाही की कई सारी मजाकिया चीजें चल रही हैं, जिन पर हमें नियंत्रण करने की आवश्यकता है, क्योंकि यह गंभीर चीजें हैं। अदालत में जो होता है वह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग का ये दूसरा पहलू है। इसके लिए जज के रूप में हमें ट्रेंड होने की जरूरत है, क्योंकि कोर्ट में कही हमारी हर बात सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है।












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