गोरखपुर ऑक्सीजन कांड: डॉ कफील को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत
नई दिल्ली। बीआरडी ऑक्सीजन कांड में फंसे निलंबित डॉक्टर कफील खान को सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की एक डबल बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश पर मुहर लगाते हुए राज्य की योगी सरकार को निर्देश दिया है कि सरकार उनके निलंबन की अवधि के देय और भत्ते के भुगतान के साथ विभागीय जांच को सात जून तक समाप्त करे। बता दें कि डॉ. कफील ने अपने निलंबन को लेकर चल रही जांच को कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजय किशन कौल ने योगी सरकार को तीन महीने के भीतर उनके निलंबन के संबंध में जांच पूरी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही 23 अगस्त 2017 से वर्तमान निलंबन तक के बकाया देय और भत्ते के भुगतान का आदेश दिया गया है। ये भुगतान राज्य सरकार को 7 जून के भीतर कर देना होगा। हालांकि कोर्ट ने उनके निलंबन में दखल देने से इंकार कर दिया है। बता दें कि, इस मामले में डॉ. कफील समेत सभी 8 लोगों को अभी तक बहाल नहीं किया गया है। ना ही निलंबन के दौरान उनके देयकों का भुगतान हुआ।
कफील खान को 10 अगस्त को बीआरडी मेडिकल कालेज में हुए आक्सीजन कांड में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए दो सितम्बर 2017 को सस्पेंड कर दिया गया था। इस मामले में 2 सितम्बर को उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जिसके बाद आठ महीने से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद 25 अप्रैल 2018 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। जमानत पर छूटने के बाद उन्होंने अपने खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही को जल्द पूर्ण करने के लिए कई बार मांग की। जब कोई मांग पूरी नहीं की गई तो उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात मार्च 2019 को आदेश दिया कि डॉक्टर कफील के खिलाफ चल रही जांच तीन महीने के अंदर पूरा किया जाए और 90 दिन में उनके देयकों का भुगतान करने का आदेश दिया था। लेकिन उनके खिलाफ डेढ़ साल बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। कफील ने कोर्ट को बताया कि निलंबन अवधि काफी होने की वजह से अब उनको जीवन निर्वाह करने में दिक्कतें आ रही है। उन्हें वेतन की आधा रकम मिल रही है। वे प्राइवेट प्रैक्टिस भी नहीं कर पा रहे हैं।












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