सुप्रीम कोर्ट ने देश में प्रदूषित शहरों की मांगी सूची, कहा-'पूरे भारत में पॉल्यूशन की समस्या'
वायु प्रदूषण के खिलाफ जारी संघर्ष में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत के सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका के दायरे को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर पूरे देश में विस्तार करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि वायु प्रदूषण केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं है। बल्कि एक राष्ट्रीय संकट है। जिसे तत्काल और समग्र दृष्टिकोण से संबोधित किया जाना चाहिए।
अन्य राज्यों में भी वायु गुणवत्ता तंत्र स्थापित करने का संकेत
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को उन शहरों की पहचान करने का निर्देश दिया है। जहां प्रदूषण का स्तर गंभीर है। साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसे तंत्र को देशभर में लागू करने की जरूरत पर जोर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हमें यह संदेश नहीं देना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट केवल दिल्ली में प्रदूषण पर काम कर रहा है। अन्य प्रमुख प्रदूषित शहरों की सूची बनाकर उनके लिए भी उपाय किए जाएं।

CAQM मॉडल को देशभर में लागू करने की संभावना
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सक्रिय CAQM को अन्य राज्यों में भी लागू करने की दिशा में चर्चा हुई। यह तंत्र वायु प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरा है। हालांकि अदालत ने चिंता जताई कि GRAP जैसे उपाय जो दिल्ली-एनसीआर में लागू किए जाते हैं। अन्य राज्यों में प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रहे हैं।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि अन्य राज्यों में भी ऐसी समस्याएं मौजूद हैं। जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। उन्होंने वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए समान तंत्र विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
दिल्ली-एनसीआर के बाहर प्रदूषण का प्रभाव
अदालत ने यह भी कहा कि एनसीआर से सटे शहरों में प्रतिबंधित गतिविधियां बेरोकटोक जारी हैं। इसके अलावा अन्य राज्यों में पराली जलाना अब भी एक गंभीर समस्या है। जिससे प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में हाल ही में वायु गुणवत्ता का स्तर गंभीर श्रेणी तक पहुंच गया था। जिससे GRAP-3 के तहत कई कड़े उपाय लागू किए गए। इसमें स्कूलों को हाइब्रिड लर्निंग में बदलने और गैर-आवश्यक डीजल वाहनों पर प्रतिबंध शामिल है।
विशेषज्ञों और हितधारकों से सुझाव मांगे
सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को निर्देश दिया कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए देशव्यापी नीति तैयार करने में विशेषज्ञों और हितधारकों की मदद ली जाए। इसका उद्देश्य ऐसी रणनीति बनाना है। जो सभी नागरिकों के लिए स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करे।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम ऐसे समय उठाया है। जब दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता का संकट गहराता जा रहा है। यह फैसला वायु प्रदूषण की बहुआयामी प्रकृति को समझते हुए इसे देशभर में व्यापक नीति और कार्रवाई की जरूरत के रूप में मान्यता देता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय वायु प्रदूषण से निपटने के लिए भारत के प्रयासों में एक मील का पत्थर है। दिल्ली-एनसीआर में CAQM की सफलता को देशभर में लागू करने की सोच प्रदूषण को राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश यह सुनिश्चित करता है कि वायु प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को एकीकृत और समावेशी बनाया जाए। जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार किया जा सके।












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