जानिए कौन से हैं वो हाई प्रोफाइल केस जिन्हें जूनियर जजों को सौंपा गया
नई दिल्लीः ऐसा पहली बार हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इन चारों जजों ने चीज जस्टिस के रवैये पर सवाल उठाए। आरोप लगाए गए कि चीफ जस्टिस महत्वपूर्ण केसों को जूनियर जजों को सौंप रहे हैं। ऐसा पहली बार हुआ था जब जजों ने ऐसे आरोप लगाए हों लेकिन ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है जब केसों को जूनियर जजों को सौंपा गया है।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी एक रिसर्च के बाद करीब 15 केस ऐसे हैं जो काफी महत्वपूर्ण हैं और जिन्हें जूनियर जजों को सौंपा गया। इन्हें केसों में से हैं राजीव गांधी हत्याकांड, बोफोर्स कांड, बाबरी मस्जिद गिराने के मामले आदि केस शामिल हैं।
सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस, गुजरात दंगों से जुड़ा बेस्ट बेकरी केस और राजीव गांधी हत्याकांड, बोफोर्स कांड आदि केसों में एक बात बहुत कॉमन था और वो थी कि इन केसों को जूनियर जजों को सौंपा गया था। इन सारे केसों में जूनियर जजों ने ही फैसला सुनाया।
साल 1998 में राजीव गांधी हत्याकांड में मृत्यदंड के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दोषी नलिनी ने अपील की थी। ये केस देश के पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या से जुड़ा होने के कारण काफी हाई प्रोफाइल था इसे उस समय सुप्रीम कोर्ट के काफी जूनियर जज जस्टिस के टी थॉमस, जस्टिस डी पी वाधवा और जस्टिस एस एस एम कादरी को सौपा गया था।
साल 2005 में एक रिट याचिक दायर की गई थी, जिसके मुताबिक अगर कोई सांसद या विधायक किसी भी मामले में दोषी पाया जाता है और वो दो या दो से अधिक समय जेल में चला जाता है तो उस पर चुनाव लड़ने से रोक लगे। उस वक्त चीफ जस्टिस ने इस मामले को जूनियर जज को भेजा था।
साल 2004 में जाहिरा हबीबुल्लाह शेख ने सुप्रीम कोर्ट में गुजरात दंगों से जुड़े बेस्ट बेकरी केस में रिट याचिका दायर की थी। उस वक्त ये केस काफी चर्चा में था, इसे भी जूनियर जज को भेजा गया था, लेकिन किसी ने भी इस पर सवाल नहीं उठाया था।
साल 2007 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई एक जूनियर जज ने की थी। इस मामले में अमित शाह का नाम था। इस केस की सुनवाई जस्टिस तरुण चटर्जी कर रहे थे जो उस वक्त काफी जूनियर थे।
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