अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन नहीं दाखिल करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड

अयोध्या के फैसले पर खिलाफ रिव्यू पिटीशन नहीं दाखिल करेगा सुन्नी वक्फ बोर्ड

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    Ayodhya case:Sunni Waqf Board not file review petition against Supreme Court verdict|वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। अयोध्या के जमीन विवाद में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुन्नी वक्फ बोर्ड रिव्यू पिटिशन नहीं दाखिल करेगा। मंगलवार को बोर्ड ने एक बैठक में इसको लेकर प्रस्ताव पास किया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के अब्दुल रज्जाक खान ने बताया है कि हमने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड की एक बैठक में पुनर्विचार याचिका दाखिल ना करने को लेकर बहुमत से फैसला हुआ है।

    बोर्ड की बैठक में फैसला

    बोर्ड की बैठक में फैसला

    सुन्नी वक्फ बोर्ड रामलला और निर्मोही अखाड़ा के साथ जमीन विवाद में पक्षकार है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में विवादित जमीन रामलला को देने का आदेश दिया है। कई कानून के जानकारों ने फैसले में विरोधाभास होने की बात कही थी। जिसके बाद कहा जा रहा था कि बोर्ज मामले में पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है। हालांकि बोर्ड की मीटिंग के बाद मंगलवार को साफ हो गया है कि बोर्ड कोई रिव्यू पिटीशन नहीं दाखिल करेगा।

     जमीयत भी कह चुका रिव्यू पिटीशन नहीं दाखिल करने की बात

    जमीयत भी कह चुका रिव्यू पिटीशन नहीं दाखिल करने की बात

    हाल ही में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने भी मामले में रिव्यू पिटिशन नहीं दाखिल करने का फैसला लिया था। बीते हफ्ते जमीयत ने एक बैठक में इसको लेकर प्रस्ताव पास किया है। बैठक के बाद जमीयत के अजीमुल्लाह सिद्दीकी ने बताया था कि हमने बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का फैसला किया है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की नेशनल वर्किंग कमेटी ने दिल्ली में हुई एक बैठक में इसको लेकर प्रस्ताव पास किया।

    क्या आया है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    क्या आया है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    अयोध्या की विवादित जमीन पर सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला और निर्मोही अखाड़ा के बीच चल रहे दशकों पुराने मुकदमें में सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को जमीन पर राम जन्मभूमि न्यास को मालिकाना हक देने का आदेश सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सर्वसम्मति से फैसले में विवादित जमीन हिंदू पक्ष को देते हुए सरकार से मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने के लिए कहा है और मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में किसी और जगह 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। इससे पहले इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीनों पक्षों में जमीन बराबर बांटने का फैसला दिया था।

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