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सुंजवान आतंकी हमला: जैश और लश्‍कर बढ़ा रहे हैं रोहिंग्‍या मुसलमानों की तरफ हाथ!

भारत में अवैध तरीके से बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों पर कई बार चिंता जताई जा चुकी है। फरवरी 2017 में जब म्‍यांमार के नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर (एनएसए) यू थाउंग भारत दौरे पर आए थे तो भारत ने उन्‍हें इस चिंता से अवगत कराया था।

जम्‍मू। जम्‍मू के सुंजवान में आतंकियों ने आर्मी कैंप को निशाना बनाया है। इस हमले के बाद से ही जम्‍मू में बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों का मसला एक बार फिर से गर्म हो गया है। जिस जगह पर हमला हुआ है उससे कुछ ही दूर पर रोहिंग्‍या मुसलमान बसे हुए हैं। जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा के स्‍पीकर कवीन्द्र गुप्ता ने कहा कि इस हमले में रोहिंग्या शरणार्थियों का प्रयोग होना भी संभव है। उनके इस बयान ने इस मसले को फिर से हवा दे दी है। उनका यह बयान भले ही ज्‍यादा सरोकार न रखता हो लेकिन भारत में अवैध तरीके से बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों पर कई बार चिंता जताई जा चुकी है। फरवरी 2017 में जब म्‍यांमार के नेशनल सिक्‍योरिटी एडवाइजर (एनएसए) यू थाउंग भारत दौरे पर आए थे तो भारत ने उन्‍हें इस चिंता से अवगत कराया था।

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भारत ने जताई है चिंता
फरवरी 2017 में म्‍यांमार के एनएसए भारत आए थे। उनके दौरे पर ही भारत की ओर से रोहिंग्‍या मुसलमानों से जुड़ी चिंताओं के बारे में उन्‍हें बताया गया था। भारत ने उन्‍हें बताया था कि पाकिस्‍तान का आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा अपने संगठन में रोहिंग्‍या मुसलमानों को रेडिक्‍लाइज्‍ड करके शामिल कर रहा है। भारत की ओर से कहा गया था कि लश्‍कर का यह कदम इस क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन सकता है। भारत ने म्‍यांमार को इस समस्‍या का राजनीतिक हल तलाशने की सलाह दी थी। सुंजवान में जो आतंकी हमला हुआ है उसके पीछे जैश-ए-मोहम्‍मद को जिम्‍मेदार माना जा रहा है। पिछले वर्ष जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर ने रोहिंग्‍या मुसलामानों के हाल पर चिंता जताई थी और साथ ही उन तक पहुंचने की भी अपील की थी। उसकी इस अपील के बाद एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया था कि मसूद अजहर का यह कदम दक्षिण एशिया में अशांति फैला सकता है।

करीब 10,000 रोहिंग्‍या मुसलमान जम्‍मू में
अगस्‍त 2017 में जब म्‍यांमार में 24 पुलिस पोस्‍ट और मिलिट्री कैंप पर आतंकी हमला हुआ तो एक बार फिर से रोहिंग्‍या मुसलमान चर्चा में आ गए। इस हमले में करीब 32 लोग मारे गए थे। हमले को म्‍यांमार की सेना पर पिछले एक दशक में हुआ सबसे खतरनाक हमला करार दिया गया। इस हमले के बाद बांग्‍लादेश के रास्‍ते भारत में आने वाले रोहिंग्‍या मुसलमानों की वजह से सुरक्षा एजेंसियों में चिंता बढ़ गई। जम्‍मू में रोहिंग्‍या मुसलमानों की अच्‍छी खासी आबादी है।कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्‍मू में करीब 10,000 रोहिंग्‍या मुसलमान हैं। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष ऐलान किया था कि सरकार जम्‍मू में बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों की पहचान करने और उनका पता लगाने की योजना बना रही है।

नागरिकों में असंतोष की भावना
सरकार के शीर्ष अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि अगर संभव होगा तो सरकार गैर-कानूनी तरीके से जम्‍मू में बसे रोहिंग्‍या मुसलमानों को म्‍यांमार वापस भेज देगी। म्‍यांमार में जबसे रोहिंग्‍या मुसलमानों का पलायन शुरू हुआ उन्‍होंने बड़े पैमाने पर जम्‍मू में शरण लेनी शुरू कर दी। जम्‍मू के स्‍थानीय नागरिकों में भी रोहिंग्‍या मुसलमानों की बढ़ती आबादी को लेकर एक असंतोष की भावना है। यहां के लोगों का मानना है कि भले ही आज हालात थोड़े ठीक हों लेकिन भविष्य में कई तरह के खतरे पैदा हो गए हैं।

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