अद्भुत संयोग! हैदराबाद में तेलंगाना दिवस पर दिखा Sun Halo,जानिए इसके बारे में
हैदराबाद, 2 जून: बुधवार को तेलंगाना का स्थापना दिवस मनाया गया और इसी दिन दोपहर में हैदराबाद के आसमान में एक ऐसा नजारा दिखा जिससे लोग भौंचक्के रह गया। यह 'सन हेलो' या सूर्य प्रभामंडल का दुर्लभ नजारा था। इसे '22 डिग्री सर्कुलर हेलो' के नाम से भी जाना जाता है, जो बहुत ही असाधारण प्रकाशीय सौर चमत्कार है। बता दें कि हाल ही में कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भी प्रकृति ने इसी तरह का प्रकाशीय चमत्कार दिखाया था। लेकिन, जानकारी के मुताबिक तब वह कर्नाटक के बड़े हिस्से में देखा गया था और लंबे समय तक दिखाई भी दिया था।

'सन हेलो' क्या है ?
हैदराबाद में बुधवार दोपहर आसमान में सूरज के ऊपर बने सतरंगी छल्ले से लोगों का कौतूहल बढ़ गया। करीब सवा 12 बजे से पौने 1 बजे के बीच इस 22 डिग्री के सूर्य प्रभामंडल को मोबाइल कैमरों में कैद करने वालों की होड़ लग गई। देखते ही देखते सोशल मीडिया पर यह दुर्लभ आकाशीय घटना की तस्वीरें छा गईं। ज्यादातर लोगों ने शहर में इससे पहले प्रकृति के ऐसे मनोरम नजारे को नहीं देखा था। अगर विज्ञान के नजरिए से देखें तो 'सन हेलो' तब बनता है, जब वातावरण में बादलों की ऊपरी परत में मौजूद बर्फ के करोड़ों क्रिस्टल पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं और उससे टकराकर 22 डिग्री रेडियस का इंद्रधनुषी गोला बनता है। इसलिए इसे सूर्य प्रभामंडल कहा जाता है।

'सन हेलो' कब और कहां बनता है ?
'सन हेलो' उन बादलों की वजह से बनाता है जो वातावरण में बहुत ज्यादा ऊंचाई यानी 20,000 फीट से भी ज्यादा पर होते हैं। यह सर्कुलर 'हेलो' विशेष रूप से सिरस क्लाउड की वजह से पैदा होता है, जो कि पतला, अलग और बाल की तरह के बादल होते हैं। ऐसे में बादलों में मौजूद बर्फ के क्रिस्टल प्रिज्म और आईने की तरह बर्ताव करते हैं। यह वातावरण की ऐसी प्रकाशीय घटना है, जो कि मौसम विज्ञान विकसित होने से पहले मौसम के पूर्वानुमान लगाने के साधनों में शामिल था। कई बार इसका संकेत ये होता है कि आने वाले 24 घंटों में बारिश होने वाली है। क्योंकि, बारिश की शुरुआत के लिए ऐसे बादल बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

'सन हेलो' को कैसे देखें ?
इसे इंद्रधनुष की तरह उचित ऐंगल से देखा जा सकता है। कई बार यह सिर्फ सफेद दिखता है और फिर सतरंगी दिखने लगता है। जाहिर है कि जब करोड़ों क्रिस्टल पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें आपके आंखों से उचित ऐंगल बनाती हैं तो उससे इंद्रधनुषी रंग दिखाई पड़ता है। गौरतलब है कि जैसे 'सन हेलो' दिन में दिखता है, वैसे ही 'मून हेलो' रात में नजर आता है। इन दोनों के दिखाई देने की प्रक्रिया बिल्कुल एक समान है। अलबत्ता ऐसी घटनाएं बहुत कम होती हैं। वैसे पिछले ही महीने 24 मई को बेंगलुरु में भी यही नजारा देखने को मिला था और तब भी यह खूब सुर्खियों में आया था। जबकि, करीब उससे भी एक महीने पहले यह यूपी के झांसी में भी दिखा था। वैसे मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 'सन हेलो' या 'मून हेलो' का पूर्वानुमान नहीं किया जा सकता।












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