राम मंदिर पर सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र, कहा- लाएं अध्यादेश

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या के राम मंदिर के लिए चिट्ठी लिखी है। स्वामी ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र लिखते हुए कहा कि 'सरकार राम जन्मभूमि के स्वामित्व पर एक अध्यादेश ला सकती है और इस तरह एक प्रतिष्ठित निकाय को जमीन सौंपने के लिए कानून पारित कर सकती है।' अपने पत्र में स्वामी ने कहा कि, 'मौजूदा दावेदारों को भूमि की जगह उनके दावे के नुकसान के लिए मुआवजा दिया जा सकता है।' स्वामी ने कहा कि 'कांग्रेस-प्रभावित वकील मामले में प्रगति रोकना चाह रहे हैं। इसलिए मैंने सोचा कि हमें संविधान बनाना चाहिए और कानून को हथियार बनाना चाहिए। अध्यादेश लाना चाहिए।'

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई

गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद प्रॉपर्टी विवाद में बुधवार को एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। 2.7 एकड़ के इस भूमि विवाद मामले में अलग-अलग वकीलों और संगठनों की तरफ से दाखिल की गई 32 हस्तक्षेप याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इनमें अपर्णा सेन और तीस्ता सीतलवाड़ की याचिकाएं भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को करेगा। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी से पूछा है कि उन्‍हें इस मामले में तीसरे पक्ष के रूप में शामिल होने की इजाजत आखिर क्‍यों दी जाए। वहीं स्वामी ने कोर्ट में कहा कि उनका मौलिक अधिकार किसी भी प्रोपर्टी के अधिकार से ज्यादा अहम है।

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ किया है कि

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ किया है कि

14 मार्च को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ किया है कि वह किसी भी पार्टी को समझौते के लिए नहीं कह सकती है। अदालत ने कहा कि वो किसी पर ये दबाव नहीं डाल सकती कि वो समझौता कर लें। फरवरी में मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अदालत की नजर में ये एक प्रोपर्टी से जुड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि आस्था जैसी बात अदालत के लिए कोई मायने नहीं रखती है।

अनुवाद का काम लगभग पूरा हो गया

अनुवाद का काम लगभग पूरा हो गया

इस पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच करेगी। आठ मार्च को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के सामने हुई मीटिंग में सभी पक्षों का कहना था कि कागजी कार्रवाई और अनुवाद का काम लगभग पूरा हो गया है। बता दें, रामायण, रामचरितमानस व गीता आदि के दस्तावेजों का अंग्रेज़ी में अनुवाद का काम हो चुका है। राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद केस में करीब 9 हजार से ज्यादा पन्ने हैं जो हिन्दी, पाली, उर्दू, अरबी, पारसी, संस्कृत आदि सात भाषाओं हैं इनका अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। कोर्ट के आदेश पर अनुवाद का यह काम उत्तर प्रदेश सरकार ने किया है।

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