तेलंगाना सरकार से छात्रों ने बीएससी नर्सिंग के लिए एडमीशन मानदंडो में ढील देने की गुजारिश
तेलंगाना में बीएससी (नर्सिंग) के लगभग 102 नर्सिंग कॉलेज हैं, जिनमें प्रवेश के लिए दो वेब काउंसलिंग हुई़। नर्सिंग कॉजेलों में काउंसलिंग के बाद अभी भी 6,500 में से 3,000 सीटें खाली हैं। तेलंगाना में छात्रों ने राज्य सरकार और कलोजी नारायण राव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (KNRUHS) से बीएससी नर्सिंग के लिए प्रवेश मानदंड में ढील देने का आग्रह किया है। इसके संबंध में छात्रों ने सरकार को एक पत्र भी लिखा है।

बता दें पंजाब, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश छत्तीसढ़ समेत अन्य कुछ राज्यों ने नर्सिंग कालेजों में एडमीशन के मापदंडो में छूट दी है। इन राज्यों में बिना किसी रैंक के आधार पर ईएएमसीईटी पास करने वाले छात्रों का सलेक्शन किया है।
तेलंगाना के लगभग बीएससी नर्सिंग के 102 नर्सिंग कॉलेज हैं। जिसमें केएनआरयूएचएस, वारंगल के कॉलेजों में 6500 छात्रों की सीट है लेकिन इस साल इनमें से केवल 3 हजार सीट ही भरी है।
बता दें तेलंगाना के कॉलेजों के लिए वेब काउंसलिंग 1 और 14 अक्टूबर को आयोजित की गई थी। पिछले दस वर्षों से बीएससी (नर्सिंग) में में एडमीशन इंटरमीडिएट के जीवविज्ञान, भौतिकी और रसायन विज्ञान (बीआईपीसी) पाठ्यक्रमों में मिले नंबरों के आधार पर दिया जाता रहा है।
वहीं इस साल नर्सिंग में एडमीशन देन वाले विश्वविद्यालय ने एडमीशन प्रासेस में परिर्वतन किया है और भारतीय नर्सिंग परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार संयोजक कोटा सीटों के लिए 63,000 तक की EAMCET रैंक और मैनेमेंट कोटा की सीटों के लिए NEET रैंक की शुरुआत की। इस कारण से कई छात्र हाई रैंक हासिल नहीं कर सके हैं, जिस कारण उनका एडमीशन नहीं हो सका।
छात्रों ने स्वास्थ्य सचिव को एक लेटर लिखा है और उसमें बताया गया है कि बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में अधिकतर छात्र आंतरिक क्षेत्रों और खासकर आदिवासी समाज से ताल्लुक रखते हैं जिनके लिए लिए परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करने के लिए ईएएमसीईटी और एनईईटी के लिए पर्याप्त कोचिंग केंद्र उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों का मानना है कि प्रवेश मानदंडों में ढील देने से गरीब छात्रों के एक बड़े वर्ग को मदद मिलेगी।












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