हिंदी पर जया ही नहीं भाजपा के सहयोगी भी कर रहे मोदी का विरोध

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चेन्नई। हिंदी को लेकर उठा राजनैतिक विवाद अब जोड़ पकड़ने लगा है। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने केन्द्र के उस निर्देश पर आपत्ति जताई है, जिसमें कथित रूप से कहा गया है कि सरकारी विभाग सोशल साइट्स पर हिन्दी का प्रयोग करें। जयललिता के बाद तमिलनाडु की अन्य प्रमुख पार्टियों ने भी हिन्दी के विरोध में मुहिम छेड़ दिया है। जिनमें से दो भाजपा की सहयोगी पार्टियां भी हैं।

गौरतलब है कि केन्द्रीय गृहमंत्रालय की ओर से पिछले दिनों यह निर्देश दिया गया है कि सभी सरकारी विभाग और अधिकारी फेसबुक, ट्वीटर, ब्लॉग, यू-ट्यूब और गूगल जैसी सोशल साइट्स पर हिन्दी के इस्तेमाल को प्राथमिकता दें। अंग्रेजी वैकल्पिक भाषा है।

जयललिता ने 1976, राजभाषा नियम का हवाला देते हुए कहा कि भारत के क्षेत्र-सी में रह रहे सभी लोगों के लिए सोशल साइट्स पर संवाद की भाषा अंग्रेजी ही होनी चाहिए।उन्होंने केन्द्र के इस निर्देश में पर्याप्त संशोधन करने की मांग की है। और बदलाव की बात करते हुए कहा कि सोशल साइट्स पर अंग्रेजी का प्रयोग सुनिश्चित हो। साथ ही जयललिता ने तमिलनाडु की जनता की ओर से तमिल को आधिकारिक भाषा बनाने की उठते मांग को फिर से हवा दिया।

वहीं , पीएमके और एमडीएमके, एनडीए के दो घटक दल भी नरेन्द्र मोदी के इस कदम का पुरजोर विरोध कर रही है। पीएमके के संस्थापक एस रामादोस ने तो यहां तक कह डाला कि संविधान के आठवीं अनुसूची में प्रस्तावित सभी 22 भाषाओं को आधिकारिक कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी पर भी हिंदी भाषा के प्रयोग को थोपे जाना सरासर गलत है। वहीं एमडीएमके के प्रमुख वाइको ने इसे संवेदनशील मुद्दा करार दिया है। जिससे तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच सकता है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी अंग्रेजी को सुनिश्चित करने की बात कही है। क्योंकि जम्मू-कश्मीर में उर्दू और अंग्रेजी ही आधिकारिक भाषा हैं।

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