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अफगानिस्तान में अगवा हुए भारतीय मज़दूरों की कहानी

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    अफगानिस्तान में अगवा हुए भारतीय मज़दूरों की कहानी

    अफ़गानिस्तान में छह मई को अगवा हुए छह भारतीय मजदूरों में से चार झारखंड के हैं. ये लोग साल 2014 में झारखंड से काम करने अफ़ग़ानिस्तान गए थे.

    ये मज़दूर आरपीजी ग्रुप की कंपनी केईसी इंटरनेशनल के लिए वहां काम करते थे. ये कंपनी वहां बिजली उत्पादन और उसके डिस्ट्रिब्युशन से जुड़ी हुई है.

    इनमें से दो लोग अब भी काबुल में हैं और अपने भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं. इन्हीं में से एक किशुन महतो से मेरी बात हुई.

    किशुन गिरिडीह ज़िले के बागोदर प्रखंड के रहने वाले हैं.

    उन्होंने काबुल से फोन पर बताया कि अपने दोस्तों के अपहरण के बाद वे आतंकित हैं और जल्दी भारत लौटना चाहते हैं.

    किशुन को उम्मीद है कि भारत और अफ़ग़ानिस्तान की सरकारें इसमें उनकी मदद करेंगी. इस दौरान उन्होंने अपहरण की पूरी कहानी बताई.



    कैसे हुआ अपहरण और क्या है पूरी कहानी

    किशुन महतो ने बताया कि रविवार की सुबह 9 बजे अपहरण हुआ.

    "छह मई की सुबह नौ बजे मेरे चार दोस्त और बिहार और केरल के एक-एक साथी के साथ गाड़ी से साइट पर जा रहे थे."

    "ड्राइवर अफ़ग़ानिस्तान का ही था. इनकी टाटा गाड़ी पुल-कुम्हरी शहर से कुछ किलोमीटर आगे पहुंची थी, तभी बाग-ए-शामल इलाके में कुछ बंदूक़धारियों ने इनका अपहरण कर लिया."

    "हमलोग पुल-कुम्हरी (बागियान प्रोविंस की राजधानी) में जहां रहते हैं, वहां से साइट पर पहुंचने में बमुश्किल आधा घंटा लगता है. जब ये लोग तीन घंटे तक साइट पर नहीं पहुंचे तो इंजीनियर ने उनको फोन लगाना शुरू किया."

    तालिबान ने किया अपहरण

    "एक-एक कर सभी सातों लोगों को फोन किया गया. लेकिन, सबके फोन बंद मिले. तब कंपनी के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. इसके बाद उनके अपहरण की सूचना मिली. अब ड्राइवर समेत उन सातों लोगों का कोई पता नही चल रहा है."

    "अब यहां अख़बार में छपा है कि उनका तालिबान के लोगों ने अपहरण कर लिया है शायद. लेकिन, कोई भी कुछ सही-सही नहीं बता पा रहा है. एक दोस्त से संडे की सुबह फोन पर मेरी बात हुई थी. उसके कुछ ही घंटे बाद उसका अपहरण हो गया."

    "अब अफ़सोस हो रहा है. मैं पिछले 19 अप्रैल को कंपनी के काम से काबुल आ गया था. इसके बाद मेरे गांव गोरहर (बागोदर) का एक और साथी 24 तारीख़ को काबुल आ गया."

    "तब से हमलोग यहीं हैं और अब भगवान चाहेंगे, तो यहीं से झारखंड वापस लौट जाएंगे. अब पुल-कुम्हरी वापस जाने का मन नहीं है. बस मेरे दोस्त जल्दी रिहा हो जाएं."

    चार साल से अफ़ग़ानिस्तान में

    "हम लोग 29 मई, 2014 को अफ़गानिस्तान आए थे. मेरे साथ छह लोग बागोदर (गिरिडीह) प्रखंड के थे. लेकिन, इनमें से एक लड़का दो साल पूरा होने के बाद भारत वापस लौट गया."

    "पांच लोग अभी यहीं अफ़ग़ानिस्तान में हैं. इनमें से ही तीन लोगों का अपहरण हो गया है. वे लोग मेरे प्रखंड बागोदर के रहने वाले हैं जबकि एक अपहृत साथी टाटीझरिया (हजारीबाग) का है."

    "पुल-कुम्हरी शहर में रहकर हमलोग केईसी कंपनी में बिजली की ट्रांसमिशन लाइन के टावर का काम करते हैं. पहले हम पांचों लोग एक ही साथ रहते थे लेकिन बाद में हमारा एक साथी अलग रहने लगा."

    "इसके बाद मैं अपने दोस्तों के साथ रहने लगे. अब मेरे कुछ दोस्तों का अपहरण हो गया है. मेरे दो दोस्त बागोदर प्रखंड के घाघरा के रहने वाले हैं जबकि एक दोस्त इसी प्रखंड के महुरी गांव के निवासी हैं."

    "कुछ साल पहले इसी इलाके में जुडिन डिसूजा नामक एक भारतीय का अपहरण हो गया था. उसे अपहर्ताओं ने 40 दिन बाद रिहा किया था. तब यह हल्ला हुआ कि तालिबान ने उसका अपहरण किया है लेकिन तालिबाल के नाम पर चोरों के एक ग्रुप ने उसे उठा लिया था."

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    BBC Hindi
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    English summary
    Story of the Indian laborers kidnapped in Afghanistan

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