गैंगस्टर, जो पहनता था बुलेटप्रूफ जैकेट, अपराध की दुनिया का बादशाह
एक कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल की कहानी, जिसने 10 गुर्गों से 200 अपराधियों का गैंग खड़ा किया।
नागौर। कुख्तात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह नागौर को मार गिराने में राजस्थान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, पुलिस की मुठभेड़ में आनंदपाल मालासर में एंनटाउंटर में मार गिराया गया है। शनिवार देर रात चुरू जिले के मालासर में पुलिस को इस बात की जानकारी मिली थी कि आनंदपाल मालासर में है, जिसके बाद पुलिस की टीम ने यहां धावा बोला और सफलतापूर्वक पुलिस ने इस एनकाउंटर को अंजाम दिया।

एनकाउंटर में हुआ ढेर
आनंदपाल की मौत की पुष्टि खुद डीजीपी मनोज भट्ट ने की है, उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार पुलिस की टीम को आनंदपाल के खिलाफ घेरेबंदी की गई, जिसमें एनकाउंटर के दौरान आनंदपाल की मौत हो गई, इसके साथ ही उसके कई रिश्तेदारों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस और आनंदपाल के बीच कई राउंड फायरिंग के बाद पुलिस को सफलता मिली, इस एनकाउंटर में दो पुलिस के भी जवान भी घायल हुए हैं, जिन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्त कराया गया है। एनकाउंटर के दौरान पुलिस ने आनंदपाल के साथी गट्टू और देवेंद्र को पकड़ लिया है।

बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने का था शौकीन
आनंदपाल का जन्म नागौर के लाडनूं तहसील के सांरदा गांव में हुआ था, वह शुरुआत से ही ऐसे शौक रखता था,जिसके लेकर वह चर्चा में आ गया। वह बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर घूमने का शौकीन था। अपने साथ हमेशा आधुनिक और खतरनाक हथियार रखता था, बहुत ही कम समय में उसने अपराध की दुनिया में अपना बड़ा नाम स्थापित किया था। आनंदपाल पर कई लूट, हत्या, डकैती सहित दर्जनों मामले दर्ज हैं।

अपराध की दुनिया में एंट्री
अपराध की दुनिया में आनंदपाल की एंट्री दलबीर गैंग के जरिए हुई थी, जब उसने 1997 में बलबीर बानूडा और राजू ठेहट से दोस्ती की। ये दोनों ही अपराधी शराब के धंथे से जुड़े थे। लेकिन जिस तरह से 2005 में इस गैंग ने एक हत्या की, उसे लेकर दोनों गैंग में दरार पड़ गई। शराब के ठेके पर यह विवाद शुरु हुआ था, जब सेल्समैन विजयपाल की राडू ठेहट से कहासुनी हो गई थी। पुलिस के अनुसार दोनों के बीच कहासुनी कुछ ज्यादा बढ़ गई थी, जिसके चलते राजू ने अपने साथियों के साथ मिलकर विजयपाल की हत्या कर दी।

कई अपराध को दिया अंजाम
आनंदपाल ने जिस तरह से 2011 में गोदारा के फोगावट में हत्याकांड की घटना को अंजाम दिया, उसने उसे कुख्यात बना दिया। 2006 में दलबीर गैंग के साथ दुश्मनी के बाद आनंदपाल ने लगातार कई घटनाओं को अंजाम दिया। 2006 में उसने राजस्थान के डीडवाना में जीवनराम गोदारा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी, सीकर के गोपाल में फोगावट हत्याकांड को अंजाम दिया, 29 जून 2011 को सुजानगढ़ में तीन लोगों पर गोली चला दी। लगातार आपराधिक घटनाओं के चलते वह मोस्टवांटेड की लिस्ट में आ गया।

200 लोगों का था गैंग
आनंदपाल ने अपने गैंग की शुरुआत महज 10-20 लोगों के साथ की थी, लेकिन उसने इस गैंग को 200 लोगों में तब्दील कर दिया था। इसने बकायदा एक टीम बनाई थी, जब उसकी पूरी टीम तैयार हो गई तो उसने खुद को फागी एसओजी के सामने सरेंडर कर दिया। गैंग मुख्य रूप से नागौर, सीकर, चूरू, जयपुर में अपना कारोबार करता था, यहां ये लोग अमीरों को अपना निशाना बनाते थे। लेकिन समय के साथ इस गैंग में भी दो फाड़ हो गए, एक गुट में आनंदपाल के साथ था तो दूसरा गुट राजू ठेहट के साथ। ये दोनों ही जेल के भीतर से अपना कारोबार चलाते थे












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