पेट्रोल, डीजल के दामों में भारी कमी के ऐलान से दिल्ली में मचेगा सियासी दंगल
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में रिकॉर्ड कमी आयी है। कच्चे तेल की कीमत ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गयी हैं। मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमत 43 डॉलर प्रति बैरल है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं जल्द ही पेट्रोल के दामों कमी का ऐलान हो सकता है।

पिछले दिनों में लगातार तीन बार कच्चे तेल की कीमतों में कमी हुई हैं लेकिन सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी नहीं की गयी। ऐसे में केंद्र सरकार दिल्ली के चुनावों को देखते हुए इसके दामों को ऐसे समय में कमी करने की तलाश कर रही है जब इसका सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को दिल्ली में हो सके।
दिल्ली चुनाव में पेट्रोल के दाम में कमी होगी तुरुप का इक्का
हालांकि तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी करने के लिए अधिकृत होती हैं लेकिन अपरोक्ष रूप से इस फैसले में सरकार के निर्णय को स्वीकार किया जाता है। दिल्ली में चुनावी बिगुल बज चुका है और सभी पार्टियों ने इसके लिए अपनी कमर कस ली है।
वहीं जिस तरह से पिछले दिनों में कई बार कच्चे तेल की कीमतों में लगातार कमी की गयी लेकिन जनता को इसका लाभ नहीं हुआ। वहीं राजनीति के जानकारों की माने तो पेट्रोल के दामों में कमी करने के फैसले को इस लिए रोककर रखा गया ताकि इसे दिल्ली चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद कम किया जा सके।
ऐसे में पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी कमी करके भाजपा दिल्ली में इसका पूरा लाभ उठाना चाहेगी। दिल्ली आम आदमी पार्टी पेट्रोल के दामों में कमी नहीं करने को लेकर सरकार पर निशाना साधती रही है। ऐसे में सरकार अगर पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी कमी करती है तो भाजपा के लिए एक साथ दो निशाने साधने में मदद मिलेगी।
पिछले दिनों भारी कमी आयी है कीमतों में
पिछले साल जून से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 60 फीसदी की गिरावट आई है और यह 111 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 43 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई है। तेल की कीमत में गिरावट भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी से गिरावट के रूप में सामने आई है। अगस्त से पेट्रोल की कीमतों में 12.27 रुपये/लीटर और डीजल की कीमतों में अक्टूबर से 8.46 रुपये/लीटर की गिरावट आ चुकी है।
साथ ही 15 जनवरी को इनकी कीमतों में एक बार फिर से कमी की संभावना है। तेल की कीमतों से महंगाई और तेल आयात बिल को कम करने में मदद मिलेगी, जो पिछले साल 160 अरब डॉलर था और इस साल इसके 100-110 अरब डॉलर रहने की उम्मीद है। इससे केरोसिन और कुकिंग गैस की सब्सिडी में भी कमी आएगी।












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