केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कंपनियों से सीधे कोरोना वैक्सीन खरीद सकते हैं राज्य
नई दिल्ली, अप्रैल 19: देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के विकराल होने के बीच सरकार ने बड़ा फैसला किया है। केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि, राज्य अब सीधे वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से अतिरिक्त कोरोना की वैक्सीन खरीद सकेंगे। भारत सरकार अपने हिस्से के 50% टीके को राज्य सरकारों को देगी, जिसका आधार ये होगा कि उस राज्य में एक्टिव केस कितने हैं।

राज्य सरकारों को अधिकार दिया गया है कि वो अतिरिक्त वैक्सीन की डोज निर्माता कंपनियों से ले सकेंगी। 1 मई से खुले बाजार में वैक्सीन उपलब्ध होगी लेकिन टीका लेने के लिए प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। जिसके तहत कोविन प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड करना होगा। भारत सरकार अपने हिस्से के 50% टीके को राज्य सरकारों को देगी, जिसका आधार ये होगा कि उस राज्य में एक्टिव केस कितने हैं। कोविड मैनेजमेंट कैसा है? टीके की बर्बादी किस स्तर पर हो रही हैं? ये भी ध्यान में रखा जाएगा।
इस घोषणा के तहत राज्य सरकार निजी अस्पताल, इंडस्ट्रियल एस्टेब्लिशमेंट, टीका उत्पादन करने वाली कम्पनियों से सीधे टीका खरीद सकती हैं। वैक्सीन निर्माता अपनी 50 प्रतिशत वैक्सीनों की सप्लाई केंद्र सरकार को करेंगी, बाकी 50 प्रतिशत को राज्यों और खुले बाजार में बेच सकेंगी। इसके अलावा निजी अस्पतालों को कोविड-19 वैक्सीन की आपूर्ति विशेष रूप से भारत सरकार के चैनल से 50% आपूर्ति के अलावा अन्य जगहों से कर सकेंगे।
इसके अलावा सरकार वैक्सीन निर्माताओं को प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इसके तहत वैक्सीन निर्माता अब अपनी सप्लाई की कुल क्षमता के 50 प्रतिशत तक को पहले से घोषित कीमतों पर राज्य सरकारों और खुले बाजार में को भेज सकेंगी। राज्यों को टीके की बिक्री खोलने का निर्णय विपक्षी नेताओं द्वारा बार-बार किया गया था। जिसमें कांग्रेस के राहुल गांधी भी शामिल हैं, जिन्होंने 10 दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा था कि हर किसी को इसकी जरूरत है।
कई राज्यों में खुराक की कमी की शिकायत आ रही है। आज सुबह पंजाब ने दूसरा रेड अलर्ट जारी किया था। पंजाब ने केंद्र को चेतावनी दी है कि उसके पास केवल तीन दिन का स्टॉक है। शुक्रवार को आंध्र प्रदेश ने कहा था कि उनके पास वैक्सीन का स्टॉक पूरी तरह से खत्म हो चुका है। इस महीने की शुरुआत में महाराष्ट्र ने कहा कि उसे टीके की कमी के चलते मुंबई और पुणे सहित 100 से अधिक टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा था।












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