SSC-CGL Recruitment 2022: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) परीक्षा के लिए अधिसूचना जारी की है, वहीं एसएससी परीक्षाओं को अंग्रेजी और हिंदी भाषा में किए जाने को लेकर विरोध शुरू हो चुका है। रोजगार के मुद्दे पर घिरी केंद्र सरकार ये नौकरियां निकालने के बाद भी भाषा विवाद को लेकर विपक्ष के निशाने पर आ गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि भाजपा ऐसा करके क्षेत्रीय भाषाओं को नीचे लाने की कोशिश कर रही है।
एसएससी द्वारा अंग्रेजी और हिंदी में Combined Graduate Level Examination-2022 आयोजित करने के ऐलान के कुछ घंटे बाद ही कुमारस्वामी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कभी न खत्म होने वाली भाषा की लड़ाई पर फिर से शासन किया और कहा कि भाजपा क्षेत्रीय भाषाओं के नीचे लाने की कोशिश कर रही थी ।
कुमारस्वामी ने ट्टीट किया
"एसएससी की नौकरी केवल हिंदी और अंग्रेजी में। क्षेत्रीय भाषा के लिए कोई विकल्प नहीं। यह हिंदी थोपने का उदाहरण नहीं तो और क्या है?
कुमारस्वामी ने कहा
अंग्रेजी और हिंदी में परीक्षा आयोजित करने का कदम दक्षिण भारत में हिंदी की पैठ बनाने का प्रयास है। बीजेपी इस बात पर अड़ी है कि वे क्षेत्रीय भाषाओं को नीचे लाना चाहती हैं। वे त्रिभाषा नीति लागू करना चाहती है। इसके साथ ही कुमारस्वामी ने कन्नड़ भाषा में परीक्षा करवाने की मांग की ।
कर्नाटक के गृह मंत्री ने बोली ये बात
वहीं कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा "पीएम मोदी ने कहा है कि सभी भाषाएं इस देश की आत्मा हैं। सभी भाषाओं का सम्मान किया जाता है। इसके बारे में बात करने का कोई मतलब नहीं है।"
एसएससी परीक्षाएं 1975 से अंग्रेजी और हिंदी में होती रहीं हैं
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने कुमारस्वामी के बयान पर कहा 'वे हर चीज को मुद्दा बनाना चाहते हैं। एसएससी परीक्षाएं 1975 से अंग्रेजी और हिंदी में आयोजित की जाती रही हैं। तब तो भाजपा सत्ता में भी नहीं थी । जब 1996 में देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे तब भी ऐसा ही किया गया था। यह आज नया नहीं है इसलिए इसमें विवाद की कोई जरूरत नहीं है।"
बीसी नागेश ने इसे कुमारस्वामी का चुनावी स्टंट बताया
वहीं कुमारस्वामी के इस बयान को भाजपा नेता बीसी नागेश ने चुनावी स्टंट बताया। उन्होंने कहा" कर्नाटक में चुनाव होने वाले है, कुमारस्वामी केवल चुनाव के कारण ऐसा बोल रहे हैं।"
डीएमके नेता कनिमोझी ने भी जताया विरोध
बता दें कुमारस्वामी से पहले डीएमके नेता कनिमोझी ने ट्टीट कर केंद्र सरकार के इस फैसले पर विरोध जताया था। क्षेत्रीय भाषाओं को ना शामिल करने पर नाराजगी जताते हुए कहा था भारतीय संघ की संप्रभुता इसके बहुलवाद में निहित है।