क़तर में वर्ल्ड कप के आयोजन से कितनी बदली 'ख़ूबसूरत खेल' की दुनिया
वर्ल्ड कप फुटबॉल 2022 का फ़ाइनल, इस खेल के इतिहास के सबसे रोमांचक मुक़ाबलों में गिना जाएगा.
रोमांच के चरम पर पहुंचे फ़ाइनल में बाजी अर्जेंटीना के हाथ लगी और इससे मौजूदा दौर के करिश्माई खिलाड़ी लियोनल मेसी की झोली में वर्ल्ड कप शामिल हो गया.
दूसरी ओर फ्रांस के किलिएन एमबापे ने दिखाया कि चार साल बाद वे कहीं ज़्यादा दमदार हो कर सामने आए. महज 23 साल की उम्र में वे दो वर्ल्ड कप में अपना जलवा बिखेर चुके हैं और उनकी गिनती महान खिलाड़ियों में होने लगी है.
वैसे पूरे टूर्नामेंट में भी 172 गोल देखने को मिले, जो किसी भी वर्ल्ड कप फुटबॉल में सर्वाधिक गोल का रिकॉर्ड है.
खेल का रोमांच हो या फिर लोकप्रियता का पैमाना, क़तर वर्ल्ड कप कामयाब रहा, हालांकि इसके आयोजन से पहले तमाम आशंकाएं जताई जा रही थीं. लेकिन खेल की दुनिया ने देखा कि 1930 से अब तक के वर्ल्ड कप आयोजन में यह सबसे काम्पैक्ट आयोजन साबित हुआ.
क़तर ने वर्ल्ड कप के मेजबानी का अधिकार करीब 12 साल पहले हासिल किया था, यह पहला मौका था जब किसी अरब देश में फुटबॉल वर्ल्ड कप का आयोजन होना था. इसके बाद इस आयोजन की शुरुआत, मेजबानी कर रहे देश की ढेरों आलोचनाएं हुईं, इसमें मेजबानी हासिल करने के लिए पैसों के इस्तेमाल से लेकर स्टेडियम निर्माण में लगाए गए कामगारों के मानवाधिकार तक का मुद्दा शामिल रहा.
लेकिन इन सबके बावजूद यह ऐसा आयोजन साबित हुआ, जिसकी चर्चा आने वाले दिनों में भी होती रहेगी.
कम ही लोगों को ध्यान होगा कि फुटबॉल वर्ल्ड कप परंपरागत तौर पर जून-जुलाई में आोजित होता रहा है. 1930 में उरुग्वे से शुरू हुआ यह सिलसिला 22वें वर्ल्डकप से पहले तक जारी रहा. फ़ीफ़ा ने क़तर के मौसम को ध्यान में रखते हुए आयोजन को नवंबर-दिसंबर में कराने की मंजूरी दी.
क़तर वर्ल्ड कप से फुटबॉल की दुनिया को एक और पहलू का पता चला. यह अपने आप में सबसे काम्पैक्ट टूर्नामेंट साबित हुआ है. क़तर का क्षेत्रफल बहुत कम, इस लिहाज से टीमों को स्टेडियम तक पहुंचने में मेट्रो से महज 30 मिनट का समय लग रहा था. इससे पहले के आयोजनों में टीमों को एक स्टेडियम से दूसरे स्टेडियम या कहें एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए फ्लाइट पकड़नी होती थी. इससे खिलाड़ियों के साथ साथ फुटबॉल देखने वाले दर्शकों को भी बहुत राहत मिली.
फ़ीफ़ा के फैन फेस्ट में शामिल एक अमेरिकी फैन जॉन जॉर्जरी ने कहा, "ट्रैवल के लिहाज से देखें तो यह सबसे बेहतरीन वर्ल्ड कप रहा है."
चार साल बाद वर्ल्ड कप फुटबॉल का आयोजन अमेरिका-कनाडा-मैक्सिको में होना है, और इस आयोजन में टीमों और दर्शकों को कितना ट्रैवल करना हो सकता है, इसकी चिंता अभी से लोगों को सताने लगी है.
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2014 में जब रूस में वर्ल्ड कप फुटबॉल आयोजन को पत्रकार के तौर पर कवर कर रहा था तब हमें मास्को से दक्षिणी रूस के शहर सोची तक जाने के लिए हमें साढे तीन घंटे की फ्लाइट लेनी पड़ी थी. हाई स्पीड ट्रेन से मास्को से सेंट पीटर्सबर्ग तक जाने में चार घंटे का समय लगता था. अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के क्षेत्रफल को देखते हुए ट्रैवल से जुड़ी आशंकाएं ग़लत भी नहीं है.
क़तर में आस पास मौजूद स्टेडियम और दोहा मेट्रो की वजह से दर्शकों के लिए दिन में एक से अधिक मैच देखना भी संभव था. इसकी कल्पना किसी दूसरे वर्ल्ड कप आयोजन में संभव नहीं है.
इसके अलावा क़तर ने इस वर्ल्ड कप के आयोजन का इस्तेमाल अपनी संस्कृति और पर्यटन को प्रमोट करने के लिए भी खूब किया. अरब परिवारों और उनके बच्चों ने कई फैन सेंटर पर दर्शकों के लिए खजूर और पानी ( क़तर पानी की कमी के लिए मशहूर है) मुहैया कराया.
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शांति का संदेश
क़तर वर्ल्ड कप के मैचों को देखने के लिए इसराइल और फ़लीस्तीन के दर्शक भी तेल अवीव से दोहा की सीधी फ्लाइट लेकर पहुंचे. इसमें सुन्नी, शिया, ईसाई और यहूदी सब शामिल थे.
दरअसल, क़तर से चार घंटे की हवाई दूरी के आस पास दो अरब लोगों की आबादी रह रही है. काहिरा, तेहरान, बगदाद और बेरूत, से तीन घंटे के भीतर दोहा पहुंचना संभव है. इस्तांबुल चार घंटे की दूरी पर है. कुवैत, ओमान, बहरीन और दुबई तो एकदम पास है. क़तर की एकमात्र ज़मीनी सीमा सऊदी अरब के शहर अबू सामरा, दोहा से महज 90 किलोमीटर दूर है.
यही वजह रही कि क़तर वर्ल्ड कप के आयोजन में मध्य पूर्व का पूरा फ्लेवर और कलेवर देखने को मिला. यह कहना ग़लत नहीं होगा कि इस आयोजन ने पूरे मध्य पूर्व को आपस में जोड़ दिया था. यह लोगों को तब भी दिखा जब अलग अलग देशों की अरब आबादी मोरक्को टीम के समर्थन में उतर आयी. उत्तर अफ्रीकी देश अल्जीरिया तक ने मोरक्को का समर्थन किया.
मोरक्को के लिए यह वर्ल्ड कप किसी स्वप्निल सफ़र जैसा रहा. वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल में पहुंचने का कारनामा दिखाने वाली पहली अरब और अफ्रीकी देश बना है मोरक्को. दोहा स्थित पत्रकार फाउद इस्माइल बताते हैं, "मैं अल्जीरिया का हूं. लेकिन मोरक्को की कामयाबी से मुझे भी गर्व महसूस हुआ है."
सीरियाई संकट, यमन में गृहयुद्ध की स्थिति, फ़लीस्तीन में कभी ख़त्म नहीं होने वाले संघर्ष, इराक़ और लेबनान का संकट ये सब अरब क्षेत्र की पहचान बन चुके हैं और लगता नहीं है कि इन सबसे जल्दी निजात मिलने वाली है.
यमन से आने वाले और दोहा में पत्रकारिता कर रहे नासिर अल हरबी चिंता जताते हैं कि शायद ही वे अपनी बेटियों के साथ अपने देश लौट पाएंगे. वे कहते हैं, "आम आदमी की ज़िंदगी तो युद्ध में तबाह हो जाती है. लेकिन इस संकट के दौर में वर्ल्ड कप के आयोजन ने हम सबको एक कर दिया."
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क़तर का इंफ्रास्ट्रक्चर
फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप की मेजबानी हासिल करने से चार साल पहले, क़तर ने 2006 में एशियाई खेलों का आयोजन किया था.
पहली बार पश्चिमी एशिया में एशियाई खेलों के आयोजन हुए थे. वर्ल्ड कप की मेज़बानी हासिल करने के एक महीने बाद क़तर नए एएफ़सी एशियन कप फुटबॉल का आयोजन किया. साथ ही हैंडबॉल, तैराकी, टेनिस, जिमनास्टिक, टेबल टेनिस, चेस और फार्मूला वन तक के खेल आयोजन किए गए.
इन सबके लिए स्टेडियम और आधारभूत ढांचों के निर्माण में अरबों रूपये ख़र्च किए गए. इन सबको तैयार करने के दौरान कुछ श्रमिकों की मौतें भी हुईं, जिसको लेकर क़तर के श्रम क़ानूनों पर सवाल भी उठे. लेकिन वर्ल्ड कप के आयोजन के लिए क़तर ने किसी तरह की कमी नहीं रखी. दुनिया भर से बेहतरीन प्राफेशनल को जोड़ा जिसमें बोरा मिलुतिनोविच और जावी हर्नेंडेज़ जैसे फुटबॉलर भी शामिल थे.
क़तर के मौजूदा शासक, आमिर शेख तमीम बिन हमद अल थानी वैसे तो इस क्षेत्र के सबसे कम उम्र के शासक हैं लेकिन उन्होंने दिखाया कि क़तर विश्व स्तरीय आयोजन को कामयाबी के साथ कर सकता है. वर्ल्ड कप की कामयाबी के बाद क़तर तीसरी बार एएफसी एशियन फुटबॉल का आयोजन 2023 में करेगा और इसके बाद 2030 में एशियाई खेलों का आयोजन भी यहां होना है.
ज़ाहिर है क़तर ने वर्ल्ड कप के आयोजन से मेजबान देश के तौर पर जो प्रतिष्ठा हासिल की है, उसका लाभ उसे आगे भी मिलता रहेगा.
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