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2G Scam: 'CBI के पास नहीं था कोई सुराग, पता ही नहीं था किसकी जांच करनी है'

विशेष CBI जज ने आरोप पक्ष को पूरी तरह नाकाम कहा है। जज ने लिखा है, 'शुरू में आरोप पक्ष ने बड़े उत्साह से केस लड़ा। जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, उनका रवैया बदलता गया

नई दिल्ली। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक नेता कनिमोझी दोनों को इस मामले में बरी कर दिया। अदालत ने इस मामले में अन्य 15 आरोपियों और तीन कंपनियों को भी बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने अपने 1552 पेज के फैसले में कहा है कि इस मामले में सीबीआई के पास कोई सुराग नहीं था। सीबीआई को पता ही नहीं कि वह किस चीज की जांच कर रही है। CBI जज ओपी सैनी ने लिखा है 'मैं 7 साल तक लगातार 10 से 5 बजे तक सुनवाई करता रहा। गर्मी की छुट्टियों में भी सुनवाई की। मैं इंतज़ार करता रहा कि कभी कोई कोर्ट में ऐसा सबूत लेकर आए जिसे कानूनी तौर पर माना जा सके। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

2G Scam:'सुराग विहिन है सीबीआई, पता ही नहीं की जांच क्या करनी है'

विशेष CBI जज ने आरोप पक्ष को पूरी तरह नाकाम कहा है। जज ने लिखा है, 'शुरू में आरोप पक्ष ने बड़े उत्साह से केस लड़ा। जैसे जैसे समय आगे बढ़ा, उनका रवैया बदलता गया। ये समझ ही नहीं आ रहा था कि वो क्या साबित करने चाहते हैं। इस दौरान वरिष्ठ अधिकारियों का भी रवैया भी ढीला नज़र आया। आरोप पक्ष ये साबित नहीं कर पाया कि राजा ने किसी को फायदा पहुंचाने के लिए नियम बदलवाए।' जज ने अपने फैसले में कहा है कि ज्यादातर बातें सुनी-सुनाई बातों पर आधारित थी।

अगर हम कोर्ट के फैसले पर गौर करें तो न्यायालय ने आरोपियों को बरी तो किया है लेकिन ये नहीं कहा है कि 2008 में यूपीए सरकार के दौरान हुए 2जी आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई। पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश के अनुसार इस केस में सीबीआई सबूतों के आधार पर ये साबित नहीं कर सकी कि सभी आरोपी घोटाले में शामिल थे और इसी कारण उन्हें बरी किया गया है।

2जी मामले में फैसला सुनाने वाले जज ओपी सैनी ने 1981 में दिल्ली पुलिस में बतौर सब-इंस्पेक्टर अपने करियर की शुरुआत की थी। 6 साल तक दिल्ली पुलिस में सर्विस देने के बाद वह न्यायिक मजिस्ट्रेट की परीक्षा में बैठे, और उस साल वह परीक्षा पास करने वाले एकलौते परीक्षार्थी बने। 2011 में जब सुप्रीम कोर्ट ने 2G मामले में स्पेशल कोर्ट बनाने का आदेश दिया, तब उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें जज के रूप में सेलेक्ट किया गया। सैनी NALCO रिश्वत मामले, कॉमनवेल्थ घोटाला मामले और लाल किला शूटआउट समेत कई बेहद महत्वपूर्ण मामलों में जज रह चुके हैं।

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