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Sonam Wangchuk की रिहाई के लिए पत्‍नी ने राष्‍ट्रपति से लगाई गुहार, ब्रिटिश शासन जैसा अत्याचार का लगाया आरोप

Sonam Wangchuk: लेह-लद्दाख में हिंसा के बाद अरेस्‍ट किए गए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बीते कई दिनों से जेल में बंद हैं। उनकी पत्‍नी गीतांजलि जे. आंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपने पति सोनम वांगचुक की रिहाई के लिए एक भावुक पत्र लिखा है।

सोनम वांगचुक को लद्दाख में 24 सितंबर को हुई हिंसक झड़पों के बाद हिरासत में लिया गया था और तब से वे राजस्थान की जोधपुर जेल में बंद हैं। राष्ट्रपति को लिखे तीन पन्नों के पत्र में, वांगचुक की पत्नी ने अपने पति के खिलाफ "विचहंट" (जादू-टोना) का आरोप लगाया है।

sonam wangchuk

गीतांजलि ने कहा कि पिछले चार सालों से अपने लोगों के लिए आवाज उठाने के कारण उनके पति को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें अपने पति की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

लेह के उपायुक्त के माध्यम से भेजे गए प्रतिनिधित्व में आंगमो ने कहा, "हम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई का अनुरोध करते हैं, वह व्यक्ति जो कभी किसी के लिए खतरा नहीं हो सकता, अपने राष्ट्र के लिए तो बिल्कुल भी नहीं। उन्होंने अपना जीवन लद्दाख के बहादुर बेटों की सेवा में समर्पित किया है और हमारे महान राष्ट्र की रक्षा में भारतीय सेना के साथ एकजुटता से खड़े हैं।"

इसके साथ ही गुरुवार को पसोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने हाल ही में लद्दाख में हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय पर ब्रिटिश शासन जैसा अत्याचार करने का आरोप लगाया है और सवाल उठाया है कि क्या भारत वास्तव में आज़ाद है।

गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर तीखे लहजे में लिखा कि 1857 में, 24,000 अंग्रेजों ने 30 करोड़ भारतीयों पर अत्याचार करने के लिए 1,35,000 भारतीय सिपाहियों का उपयोग किया था। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि आज, गृह मंत्रालय के आदेश पर, मुट्ठी भर प्रशासक 2,400 लद्दाखी पुलिस का दुरुपयोग करके 3 लाख लद्दाखियों को प्रताड़ित कर रहे हैं।

26 सितंबर को क्‍या हुआ, जिसके बाद अरेस्‍ट किए गए सोनम?

गौरतलब है कि वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था, यानी लेह शहर में हुई हिंसक झड़पों के दो दिन बाद। इन झड़पों में चार लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे। यह हिंसा लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने जैसी मांगों के समर्थन में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।

वांगचुक की हिरासत को "अवैध" बताया

उन्होंने वांगचुक की हिरासत को "अवैध" बताया और कहा कि उन्हें इसकी सूचना एक थाना अधिकारी ने दी थी। आंगमो ने कहा, "मुझे यह भी बताया गया था कि अधिकारी मुझे मेरे कानूनी अधिकारों के बारे में बताएंगे। आज तक ऐसा नहीं किया गया है। मैं स्तब्ध और तबाह हूं।" उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें ले जाया जा रहा था, तब उन्हें अपने कपड़े तक लेने की अनुमति नहीं दी गई थी।

आंगमो ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे नहीं पता कि उन्हें ताज़ा कपड़े और बुनियादी सुविधाएं मिली हैं या नहीं, जिसमें वे दवाएं भी शामिल हैं जिनकी उन्हें रोजाना जरूरत होती है, खासकर सितंबर में 15 दिनों के उनके उपवास के बाद, जिसने उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर कर दिया है।"

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वांगचुक भारतीय सेना के अधिकारियों और जवानों के लिए आश्रय बना रहे थे। उन्होंने कहा, "लद्दाख के इस सपूत के साथ इतना बुरा व्यवहार करना केवल एक पाप ही नहीं, बल्कि एकजुटता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ मजबूत सीमाएं बनाने के लिए एक रणनीतिक गलती भी है।"

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