Sonam Wangchuk PM Modi से बोले, लद्दाख में सबकुछ ठीक नहीं, 18000 फीट और माइनस 40 डिग्री में 5 दिन उपवास
जलवायु परिवर्तन के कारण पूरी धरती संघर्ष कर रही है। लद्दाख में इनोवेशन और पर्यावरण के अनुकूल संसाधनों का इस्तेमाल प्रोमोट करने वाले सोनम वांगचुक प्रदेश पर मंडराते खतरे से चिंतित हैं। उन्होंने पीएम से सुरक्षा की अपील की।

Sonam Wangchuk PM Modi से सबकुछ ठीक न होने की बात कहकर सुर्खियों में आए हैं। लद्दाख के समाज सुधारक सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लद्दाख की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह करते हुए कहा कि लद्दाख में सबकुछ ठीक नहीं होने के संकेत मिल रहे हैं क्योंकि एक अध्ययन में लगभग दो-तिहाई ग्लेशियरों के विलुप्त होने की बात सामने आई है। बता दें कि सोनम वांगचुक इनोवेशन के लिए लोकप्रिय हैं। उनकी लाइफ से प्रेरित बॉलीवुड फिल्म '3 इडियट्स' काफी पॉपुलर हुई थी।

तेजी से पिघल रहे हैं ग्लेशियर
सोनम वांगचुक ने जोर देकर कहा कि अगर लापरवाही जारी रही और लद्दाख में इंडस्ट्री को धड़ल्ले से अनुमति दी जाएगी तो यहां के ग्लेशियर विलुप्त हो जाएंगे। ग्लेशियर के लुप्त होने पर भारत और उसके पड़ोस में भी पानी की कमी के कारण भीषण संकट पैदा हो सकता है। विकराल समस्या की तरफ संकेत करते हुए सोनम ने कहा, यदि उपाय नहीं किए गए, तो उद्योग, पर्यटन और कॉमर्शियल गतिविधियां लद्दाख में फलती-फूलती रहेंगी। अंततः ग्लेशियर खुद ब खुद समाप्त हो जाएंगे। पीएम मोदी से मुखातिब वांगचुक ने कहा, कश्मीर विश्वविद्यालय और अन्य शोध संगठनों के हालिया अध्ययनों में निष्कर्ष निकला है कि अगर उनकी ठीक से देखभाल नहीं की जाए तो लेह-लद्दाख में लगभग दो तिहाई ग्लेशियर समाप्त हो जाएंगे। राजमार्गों और मानवीय गतिविधियों से घिरे ग्लेशियर तुलनात्मक रूप से तेज गति से पिघल रहे हैं।

"औद्योगिक शोषण" से लद्दाख को बचाएं PM मोदी
उन्होंने कहा कि केवल अमेरिका और यूरोप के लोग ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार नहीं। स्थानीय प्रदूषण और उत्सर्जन इसके लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। लद्दाख जैसे क्षेत्रों में न्यूनतम मानवीय गतिविधियां होनी चाहिए ताकि यहां और देश भर में स्थानीय लोगों के लिए ग्लेशियर बरकरार रह सकें। सतत विकास को अपनाने की जरूरत पर बल देते हुए, इंजीनियर से शिक्षा सुधारक तक का सफर तय करने वाले वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की, "औद्योगिक शोषण" से लद्दाख और अन्य हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इससे लोगों के जीवन और रोजगार को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

भोजन और कपड़ों की बर्बादी से बचने की अपील
वांगचुक ने कहा, मेरा मानना है कि सरकार के अलावा, लोगों को भी समान रूप से संवेदनशील होना चाहिए। लोग जलवायु परिवर्तन के बारे में चिंतित हैं और इसे कम करने के उपायों पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखते हुए विकास लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास हो रहा है ताकि प्रकृति मानव को अपने संसाधन और सेवाएं प्रदान करना जारी रख सके। उन्होंने बच्चों से भोजन और कपड़ों की बर्बादी से बचने की अपील की क्योंकि यह बदले में पर्यावरण को तकनीकी रूप से नुकसान पहुंचाता है। वांगचुक ने अपने यूट्यूब चैनल पर 13 मिनट का वीडियो शेयर किया। उन्होंने देश और दुनिया के लोगों से लद्दाख के "पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील" क्षेत्र की रक्षा में 'तत्काल' मदद करने की अपील की।

-40 डिग्री सेल्सियस तापमान में #ClimateFast
वांगचुक ने पीएम मोदी से भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत पारिस्थितिकी तंत्र में हस्तक्षेप न करने और उसकी रक्षा करने की अपील की। भारतीय हिमालय में लद्दाख के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र की रक्षा में मदद करने की अपील करते हुए वांगचुक ने कहा, "लद्दाख में सब कुछ ठीक नहीं है!" पीएम मोदी @narendramodi को टैग कर उन्होंने कहा, पीएम से हस्तक्षेप और पर्यावरण के लिहाज से नाजुक लद्दाख को सुरक्षा प्रदान करें। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, सरकार और दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए 26 जनवरी से 5 दिन #ClimateFast पर बैठने की योजना बना रहा हूं। खारदुंगला में समुद्र तल से 18000 फीट की ऊंचाई और -40 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले क्षेत्र में बैठेंगे।
नीचे देखें वांगचुक का ट्वीट---
#SaveLadakh के लिए 5 दिन का लंबा उपवास
वांगचुक ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, वह चाहते हैं कि गणतंत्र दिवस पर उनका संदेश पीएम मोदी और लोगों तक पहुंचे। इसी मकसद से वे पांच दिन का उपवास कर रहे हैं। 5 दिन का लंबा उपवास (सांकेतिक अनशन) रखूंगा क्योंकि ग्लेशियर अब जीवित नहीं रहेंगे। एक अन्य ट्वीट में वांगचुक ने लिखा, "26 जनवरी से खारदुंगला में 18,000 फीट माइनस 40 डिग्री सेल्सियस पर मेरे #ClimateFast के लिए टेस्ट रन... फयांग में 11,500 फीट पर -20 के तापमान है। वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लद्दाख बचाने की अपील के लिए हैशटैग- #SaveLadakh का इस्तेमाल भी किया।
नीचे देखें वांगचुक का ट्वीट---
बदलाव के अगुआ, मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित
बता दें कि 1966 में जन्मे वांगचुक शिक्षा पाकर एक मैकेनिकल इंजीनियर बने। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) के निदेशक, वांगचुक को वर्ष 2018 में मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। करीब 14 साल पहले 2009 में वांगचुक के व्यक्तित्व पर आधारित फिल्म में आमिर खान ने फुनसुख वांगडू का काल्पनिक चरित्र निभाया। शैक्षणिक सुधार की वकालत करने वाले वांगचुक ने 1994 में, सरकारी स्कूल प्रणाली में बदलाव के लिए ऑपरेशन न्यू होप लॉन्च किया।

इनोवेटिव स्कूल SECMOL की सफलता
लद्दाख में रहने वाले इंजीनियर वांगचुक अपने इनोवेशन वाले स्कूल- Students' Educational and Cultural Movement of Ladakh (SECMOL) के कैंपस के कारण भी लोकप्रिय हैं। इसका पूरा परिसर सौर ऊर्जा से चलता है। खाना पकाने, रोशनी या हीटिंग के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग नहीं किया जाता।

पर्यावरण को समर्पित इंजीनियर
34 साल पहले उन्होंने 1988 में लद्दाख के बच्चों और युवाओं का समर्थन करने और उन छात्रों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से SECMOL की स्थापना की थी। हालांकि, सिस्टम ने इसे कथित तौर पर असफल करार दिया था। बता दें कि इससे पहले भी वांगचुक पर्यावरण के मुद्दों पर चिंताएं जाहिर करते रहे हैं।












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