पंपोर में एक ओर सैनिक शहीद हो रहे थे दूसरी ओर पाकिस्तान के लिए नारे लगे रहे थे
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के पंपोर में 50 घंटे बाद इंडियन आर्मी और सीआरपीएफ ने आतंकियों के कब्जे से एक सरकारी बिल्डिंग को खाली कराने में सफलता हासिल की।
इस सफलता के लिए इंडियन आर्मी को दो कैप्टन समेत एक लांस नायक की शहादत झेलने पर मजबूर होना पड़ा तो वहीं सीआरपीएफ को भी अपने दो जवान गंवाने पड़े।
एनकाउंटर के समय सेना झेल रही थी पत्थर
गोली के साथ गाली और पत्थर झेलते सैनिक
यह कितने शर्म की बात है कि जिस समय एनकाउंटर चल रहा था सैनिको पर पंपोर में पत्थर फेंके जा रहे थे। सिर्फ इतना ही नहीं पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी हो रही थी। आजाद कश्मीर के लिए नारे लगाए जा रहे थे।
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यह पहला मौका नहीं जब ऐसी घटना सामने आई है। हाल ही में घाटी के एक गांव काकापोरा में जब सेना लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के खिलाफ एनकाउंटर में बिजी थी तो भी ऐसा ही नजारा था।
सेना को सांबा सेक्टर में भी इस तरह की ही घटनाओं का सामना करने को मजबूर होना पड़ा था। यह बहुत ही चिंताजनक बात है कि कश्मीर में अब एनकाउंटर के समय सैनिकों पर पत्थर फेंकना एक ट्रेंड बन चुका है।
पंपोर एनकाउंटर में सेना झेल रही थी पत्थर
मुट्ठी भर लोग बढ़ा देते हैं सिरदर्द
जम्मू कश्मीर पुलिस के एक ऑफिसर के मुताबिक ही एनकाउंटर साइट पर कुछ विद्रोही इकट्ठा हो जाते हैं और फिर सेना के खिलाफ नारेबाजी होने लगती है।
इन लोगों की संख्या ज्यादा नहीं होती है लेकिन इन लोगों के पत्थर फेंकने और नारेबाजी करने की वजह से काफी परेशानियां आती हैं।
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फिर भी इंडियन आर्मी आपकी सेवा में!
पिछले कुछ दिनों में सेना के सामने 22 बार ऐसे मौके आए हैं जब उन्हें कश्मीर के लोगों की ओर से पत्थरों को झेलने पर मजबूर होना पड़ता है।
एक आर्मी ऑफिसर की मानें तो इतना सब होने के बाद भी सेना कभी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगी। हालांकि इन बातों की वजह से ऑपरेशंस में कई दिकक्तें आती हैं और विद्रोहियों को कुछ भी कहा जाए, वह पीछे हटने को तैयार नहीं होते हैं।
आपको बता दें कि वर्ष 2014 में जब कश्मीर में बाढ़ आई थी और सेना बचाव कार्य में लगी थी तो उस समय भी जवानों पर पत्थर फेंके जाने की घटना हुई थी।












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