Bihar News: नया ट्रेंड: मिट्टी की जांच के बाद ही उर्वरकों का उपयोग कर रहे किसान, बढ़ रही पैदावार और आय
व्यापक मिट्टी परीक्षण, नई प्रयोगशालाओं और डिजिटल मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से खेती के आधुनिकीकरण के लिए एक राज्यव्यापी पहल। यह कार्यक्रम 106 फसलों के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से उर्वरक मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिससे उपज और किसानों की आय में सुधार होता है और कृषि में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
राज्य में कृषि के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। अब किसान पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए अपने खेतों की मिट्टी की जांच करवा रहे हैं और उसी के आधार पर रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। इस नई पहल से फसलों की उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी इजाफा हो रहा है।

राज्य सरकार द्वारा कृषि के आधुनिकीकरण को बढ़ावा देने के तहत सभी 38 जिलों में मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। किसान अब यह जान पा रहे हैं कि उनकी जमीन में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किनकी कमी है। इसके आधार पर वे संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे अनावश्यक खर्च कम हो रहा है और उत्पादन बेहतर हो रहा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में करीब 3 लाख मिट्टी के नमूनों की जांच की गई है। इन नमूनों के विश्लेषण के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है, जिसमें मिट्टी की गुणवत्ता और विभिन्न फसलों—जैसे धान, गेहूं और आलू—के लिए आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा की जानकारी दी जाती है। किसानों को हर तीन वर्ष के अंतराल पर यह कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।
अब तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्हाट्सऐप के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऑनलाइन उपलब्ध इस कार्ड में लगभग 106 फसलों के लिए उर्वरक संबंधी सिफारिशें दर्ज रहती हैं, जिससे किसानों को तुरंत जानकारी मिल जाती है।
मिट्टी जांच की सुविधा को और सुलभ बनाने के लिए अनुमंडल स्तर पर 32 नई प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। वर्तमान में राज्य में 38 जिला स्तरीय, 14 अनुमंडल स्तरीय और 9 मोबाइल मिट्टी जांच प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 3 रेफरल प्रयोगशालाएं भी संचालित की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल कृषि क्षेत्र में एक "मौन क्रांति" साबित हो रही है, जो न केवल उत्पादन बढ़ा रही है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत भी बना रही है।












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