अंदर सो रहे थे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, तभी निकल आया जहरीला सांप

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जहां राष्ट्रपति आराम कर रहे थे, उसी जगह एक बेहद जहरीला सांप निकल आया।

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जहां राष्ट्रपति आराम कर रहे थे, उसी जगह एक बेहद जहरीला सांप निकल आया। सांप को देखते ही सुरक्षाकर्मी तुरंत हरकत में आ गए और आनन-फानन में वन विभाग की टीम को बुलाया गया। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद किसी तरह सांप को काबू में किया। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने आस-पास की जगह को सघनता से चेक किया।

कॉमन क्रेट प्रजाति का था सांप

कॉमन क्रेट प्रजाति का था सांप

दरअसल, शनिवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में आयोजित दो दिवसीस 'ज्ञान कुंभ' के उद्घाटन के लिए उत्तराखंड गए हुए थे। कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति देहरादून पहुंचे और आशियाना के नाम से मशहूर प्रेसिडेंट एस्टेट में आराम करने के लिए गए। जानकारी के मुताबिक रात के करीब 9 बजे, जिस समय राष्ट्रपति अंदर आराम कर रहे थे, तभी आशियाना के कर्मचारियों को एक सांप दिखाई दिया। सांप कॉमन क्रेट प्रजाति का था, जोकि बेहद जहरीला सांप होता है।

सुरक्षाकर्मियों ने ली राहत की सांस

सुरक्षाकर्मियों ने ली राहत की सांस

सांप मिलने की खबर से सुरक्षाकर्मियों में हड़कंप मच गया। सांप की सूचना तुरंत वन विभाग की टीम को दी गई। रात में अंधेरा होने के कारण सांप को पकड़ने में काफी दिक्कत आई लेकिन टीम ने कुछ देर की मशक्कत के बाद सांप को काबू में कर लिया। वन विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि सांप को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना पकड़ लिया गया है। वन विभाग की टीम सांप को पकड़कर अपने साथ ले गई। इसके बाद सुरक्षकर्मियों ने आस-पास की जगह की तलाशी ली।

पतंजलि योगपीठ और उत्तराखंड सरकार ने किया आयोजन

पतंजलि योगपीठ और उत्तराखंड सरकार ने किया आयोजन

इससे पहले राष्ट्रपति ने पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में आयोजित दो-दिवसीय 'ज्ञान कुंभ' का शुभारंभ किया। यह ज्ञान कुंभ पतंजलि योगपीठ और उत्तराखंड सरकार की ओर से आयोजित किया गया था। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा के बिना विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। शिक्षा से ही देश और समाज का समग्र विकास संभव है। राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान में शिक्षा को अनिवार्य स्थान दिया गया है। यह केंद्र और राज्यों दोनों सरकारों की जिम्मेदारी है कि वह अपने शिक्षा का बेहतर माहौल बनाएं।

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