स्मृति ईरानी: मॉडलिंग, सीरियल फिर सियासत और अब देश की कैबिनेट मंत्री

Smriti Irani
नई दिल्ली। सौंदर्य प्रसाधनों के प्रचार से लेकर मिस इंडिया प्रतियोगिता की प्रतिभागी और देश के टेलीविजन दर्शकों की लोकप्रिय 'बहू' से लेकर नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बनीं 38 साल की स्मृति ईरानी का जीवन प्रसिद्धि और सफलता के त्वरित उत्थान की कहानी है। स्मृति का राजनीतिक करियर साल 2003 में तब शुरू हुआ जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की और चांदनी चौक से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वह टीवी चैनलों में पार्टी का मुख्य चेहरा बनी रहीं।

वर्ष 2014 के आम चुनाव में स्मृति ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास के खिलाफ अमेठी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें कड़ी चुनौती दी। यद्यपि वह चुनाव हार गईं, लेकिन अभिनेत्री से राजनेता बनीं स्मृति ने राज्यसभा की सदस्य होने के नाते शपथ ग्रहण कर अब मोदी सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय पाने के लिए तैयार हैं। दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली स्मृति ने अपने एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने 10वीं के बाद पैसा कमाना शुरू कर दिया था और सौंदर्य प्रसाधन के प्रचार के लिए उन्हें 200 रुपये मिलते थे।

रूढ़ीवादी पंजाबी-बंगाली परिवार की तीन बेटियों में से एक स्मृति ने सारी बंदिशें तोड़कर ग्लैमर जगत में कदम रखा। कामयाब हुईं तो भाजपा ने उनके जज्बे को सलाम किया। उन्होंने 1998 में मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लेकिन फाइनल तक मुकाम नहीं बना पाईं। इसके बाद स्मृति ने मुंबई जाकर अभिनय के जरिए अपनी किस्मत बनाई। किस्मत उन पर मेहरबान भी थी और उन्होंने 'ऊह ला ला ला' की मेजबान के रूप में एक कड़ी में नीलम कोठारी का स्थान लिया। उन्हें यह कड़ी मिल गई और एकता कपूर को वह भा गईं जिसके बाद की कहानी एक इतिहास है।

एकता कपूर ने उन्हें टेलीविजन पर लंबे समय तक चले धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में तुलसी वीरानी का किरदार दिया जिसके बाद वह घर-घर की लोकप्रिय हुईं। छोटे पर्दे पर अच्छी बहू का किरदार करने वाली स्मृति ने अपने बचपन के मित्र जुबिन ईरानी से शादी की और दो बच्चों बेटा जौहर व बेटी जोइश की परवरिश करते हुए वास्तविक जिंदगी में भी इस भूमिका को अच्छे से निभा रही हैं। इधर, राष्ट्रीय महासचिव से लेकर भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनने के बाद वह भाजपा की उपाध्यक्ष भी नियुक्त की गईं। पार्टी की अन्य कुछ सदस्य भी अभिनय की पृष्ठभूमि से आई हैं लेकिन यह स्मृति की स्पष्टवादिता व सहनशीलता ही है जो उन्हें सभी चुनौतियों के बीच आगे ले गई।

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