माया-प्रियंका के खिलाफ हथियार बनेंगी स्मृति ईरानी!
स्मृति ईरानी को जब हाई प्रोफाइल मानव संसाधन मंत्री पद से हटाया गया, तो अधिकांश ने कहा कि यह उनका डिमोशन है? लेकिन सच पूछिये तो स्वयं नरंद्र मोदी ने स्मृति को मुक्त कर दिया है, उन जिम्मेदारियों को उठाने के लिये, जो आने वाले यूपी विधान सभा चुनाव में मिलने वाली हैं। और तो ओर अगर आक्रामक तेवर की बात करें तो भाजपा स्मृति को मायावती और प्रियंका गांधी के विरुद्ध धारदार हथियार के समान प्रयोग करने की तैयारी में है।

लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी अमेठी में राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव हार गई थीं। उसके बाद भी पार्टी ने उन पर विश्वास को कायम रखा और मंत्रालय दिया। कुछ ही दिन बाद राज्यसभा तक भेजा। यह सब तैयारी थी स्मृति ईरानी को अमेठी में फिर से प्रोजेक्ट करने की। लेकिन तमाम लोगों का कहना है कि भाजपा स्मृति को अमेठी से प्रोजेक्ट नहीं करेगी।
अब अगर राजनीतिक विष्लेषकों की मानें तो स्मृति मायावती और प्रियंका से टक्कर लेने के लिये उतरेंगी। कांग्रेस ने जिस तरह से शीला दीक्षित और प्रियंका गांधी को यूप में प्रोजेक्ट किया है, उससे साफ है कि इस महिला शक्ति का सामना करने के लिये किसी दमदार महिला को सामने रखना पड़ेगा।

उधर मायावती भी परिणामों में उलटफेर करने की तैयारी में हैं। ऐसे में अखिलेश यादव को उनसे बड़ा खतरा है। लेकिन मायावती को किससे खतरा है, यह सोचने वाली बात है।
खैर कुल मिलाकर भाजपा ने स्मृति को आगे करके भाजपा की नई तस्वीर यूपी में पेश करने की योजना बना ली है।
स्मृति ही क्यों
अब आप सोच रहे होंगे कि स्मृति ईरानी को ही क्यों? इसका जवाब भी सीधा है। पहला तो वो बेबाक बोलती हैं और उनका फैनबेस भी बहुत बड़ा है। यूपी में काफी प्रसिद्ध भी हैं। वैसे तो राजनाथ सिंह और वरुण गांधी भी आगे आना चाहते हैं, लेकिन माया और सोनिया को हैंडल करने के लिये स्मृति ईरानी से बेहतर कोई नेत्री नहीं। स्मृति बेबाक बोलती हैं, वो युवा हैं, और बहादुरी से हर मोर्चे का सामना करती हैं।












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