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दुबई में मैनेजर की नौकरी छोड़कर नवीन करने लगा स्ट्रॉबेरी की खेती, हर महीने हो रही इतने लाख की कमाई

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सीतापुर, 24 सितंबर: भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन खेती को यहां लोग अब 'जुआ' मानने लगे हैं, क्योंकि सारी कमाई और फसल बारिश पर निर्भर है। किसानों की माने तो अब किसानी करना मामूली और कम आमदनी वाला सौदा बन गया है। सच्चाई भी है कि किसानी में कमर तोड़ मेहनत हैं और कमाई के नाम पर कुछ खास हाथ नहीं आता, लेकिन अब यह भ्रम बन चुका है, क्योंकि सीतापुर के रहने वाले युवा किसान ने कुछ ऐसा करके दिखाया है, जो और लोगों का भी खेती की तरफ रुझान बढ़ाने में प्रोत्साहित करेगा।

दुबई में मैनेजर की नौकरी छोड़कर खेती शुरू

दुबई में मैनेजर की नौकरी छोड़कर खेती शुरू

आज के युवाओं का किसानी-बागबानी की तरफ झुकाव बढ़ता जा रहा है। अब इसी कड़ी में दुबई में अच्छे खासे पैकेज को छोड़कर नवीन मोहन राजवंशी ने सीतापुर में आधुनिक तकनीक से स्ट्रॉबेरी की खेती करना शुरू कर दिया। नवीन ने AMIT कॉलेज चेन्नई से एमबीए किया था, फिर पढ़ाई पूरी करने के बाद दुबई में बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर की पोस्ट पर जॉब गई और वो वहां चल गया। लेकिन एक टूर ने उसके फैसले को पूरी तरह से बदल दिया।

रेगिस्तान में फसल देखकर बदला इरादा

रेगिस्तान में फसल देखकर बदला इरादा

जानकारी के मुताबिक दुबई में नौकरी करते हुए नवीन वहां किसी फार्म पर घूमने पहुंच गया, जहां रेगिस्तान में फसलें लहलहाते हुए देख उसके मन में भी खेती-बागबानी करने को लेकर रुचि जगी और फिर उन्होंने वतन वापसी का फैसला कर किया। दो साल पहले यानी साल 2020 में कोविड के दौरान नवीन अपने घर सीतारपुर आ गए। जहां सीतापुर कृषि विज्ञान केंद्र की सहायता से आधुनिक तकनीक से स्ट्रॉबेरी की खेती करने का प्रशिक्षण लिया।

7 लाख रुपए तक की खेती से कमाई

7 लाख रुपए तक की खेती से कमाई

नवीन ने एक एकड़ में 3 लाख रुपए की लागत से करीब 20 हजार पौधे को लगाया है। जिससे 150 से 160 कुंतल के बीच फसल होती है। सारा खर्चा मिलाकर उनका एक साल में 3 लाख रुपए आता है, जिसके बाद कुछ ही महीने में आमदनी दोगुनी हो जाती है। मतलब कि 3 लाख रुपए की लागत से नवीन स्ट्रॉबेरी की खेती से 6 लाख से ज्यादा कमाते हैं। अन्य फसलों से आमदमी अलग करते हैं।

सरकार भी दे रही स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा

सरकार भी दे रही स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा

इतना ही नहीं स्ट्रॉबेरी के बीच में उन्होंने गेंदे के पौधे भी लगाए हैं, जिससे 50 हजार रुपए की इनकम हो जाती है। गेंदे की फसल खत्म होने के बाद खरबूजा उगा लेते हैं और जब खरबूजा तैयार होता है तब तक स्ट्रॉबेरी की फसल पूरी हो जाती है। इस तरह से खरबूजे का भी औसतन पैदावार 160 से 170 कुंतल के बीच हो जाता है। बता दें कि सरकार भी स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 40% तक का अनुदान दे रही है।

जानें जरूरी बात और फल के फायदे

जानें जरूरी बात और फल के फायदे

बता दें कि स्ट्रॉबेरी की बलुई और दोमट मिट्टी में खेती करना सबसे अच्छा होता है। इसके लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान सबसे उत्तम है। स्ट्रॉबेरी की खेती पॉली हाउस या फिर खुले स्थान दोनों पर की जा सकती है। स्ट्रॉबेरी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसमें भरपूर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं। स्ट्रॉबेरी में एंटी ऑक्सीडेंट के साथ ही विटामिन बी वन टू विटामिन सी प्रोटीन भी मिलता है।

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English summary
sitapur MBA farmer earning 7 lakh by strawberry farming
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