2014 के बाद एनडीए की सरकार ने पीने के पानी के लिए फंड में की कटौती
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए वोटिंग से पहले बीजेपी ने संकल्प पत्र जारी किया है। इसमें मौजूदा सरकार ने कई बिन्दुओं को शामिल किया है। जिसमें पीने का पानी के मुद्दे को भी संकल्प पत्र में शामिल किया गया है। लेकिन पीने की पानी को लेकर 'लाइव मिंट' ने एक रिपोर्ट छापी है। जिसमें ये बताया गया है कि 2014 में सत्ता हासिल करने वाली एनडीए की मोदी सरकार इसको लेकर कितनी गंभीर रही।

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014 के बाद से एनडीए सरकार ने ग्रामीण पेयजल के लिए फंड में कटौती की और स्वच्छता पर अधिक ध्यान केंद्रित किया वो भी सुरक्षित और सुनिश्चित पानी पहुंचाए बिना। जब भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 2014 के आम चुनाव के लिए प्रचार कर रहा था तो उसने ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ पीने का पानी उपलब्ध कराने का वादा किया था।
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लेकिन सत्ता हासिल करने के बाद वादे और काम में फर्क नजर आ गया। रिपोर्ट के मुताबिक एनडीए सरकार ने इसने वास्तव में NRDWP (राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम) की फंडिंग को घटा दिया है। 2014-15 में, कुल सरकारी फंड का केवल 0.6% एनआरडीडब्ल्यूपी को आवंटित किया गया था और 2018-19 तक यह घटकर 0.2% हो गया था। एकाउंटेबिलिटी इनिटिएटिव, गैर लाभकारी अनुसंधान संगठन ने अपने रिपोर्ट में बताया है कि पीने के पानी के लिए न केवल फंड के आवंटन में ककी की गई बल्कि फंड रिलीज में भी गिरावट देखने को मिली है।
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2017-18 में, आवंटित धन का केवल 72% NRDWP द्वारा खर्च किया गया था। पीने के पानी को के लिए फंड में कटौती तब की गई जब पेयजल मंत्रालय और स्वच्छता के समग्र खर्च में वृद्धि देखने को मिली है। मंत्रालय के बजट का अधिकांश हिस्सा अब स्वच्छ भारत मिशन (2018-19 में 72) के लिए आवंटित किया गया है। ग्रामीण भारत में स्वच्छता में सुधा के लिए यह मौजूदा सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है।
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