Silver Oak: शरद पवार का बंगला, जहां से हुई सियासत की धुंआधार बैटिंग, जानिए इस पेड़ के बारे में

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से जारी सियासी घमासान के बाद अब प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर साफ होती नजर आ रही है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन वाली नई सरकार के गठन की तैयारी प्रदेश में शुरू हो गई है। हालांकि, इस पूरे सियासी संग्राम में सबसे बड़े 'गेमचेंजर' बनकर उभरे शरद पवार। भतीजे अजित पवार के बगावती तेवर के बावजूद शरद पवार ने हौंसला नहीं छोड़ा, उन्होंने खुद से मोर्चा संभालते हुए न केवल अजित को सियासी मोर्चे पर चारों खाने चित्त कर दिया, बल्कि उन्हें वापस पार्टी और परिवार में लौटने के लिए मजबूर कर दिया। अजित पवार सुबह का भूला की तरह पार्टी और परिवार दोनों जगह वापस लौट चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र की सियासत के माहिर खिलाड़ी शरद पवार ने जिस तरह से अपनी पार्टी और परिवार को टूटने से बचाया उसके बाद हर किसी की जुबान पर बस उन्हीं का नाम है। पार्टी-परिवार में टूट के बेहद गंभीर मौके पर शरद पवार ने खुद संभालते हुए अपने बंगले सिल्वर ओक में पूरी रणनीतिक प्लानिंग को अंजाम दिया। आखिर शरद पवार के बंगले का नाम सिल्वर ओक क्यों पड़ा, क्या है इसकी खासियत?

महाराष्ट्र की राजनीति के 'चाणक्य' शरद पवार

महाराष्ट्र की राजनीति के 'चाणक्य' शरद पवार

दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति के 'भीष्म पितामह' माने जाने वाले शरद पवार ने जिस तरह से भतीजे अजित पवार से धोखा खाने के बाद अपनी पार्टी और विधायकों को एकजुट रखा, उससे साबित हो गया कि सूबे की सियासत के असली 'चाणक्य' वो ही हैं। अजित पवार के अचानक उठाए गए कदम के बाद एक समय ये चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या सारा गेमप्लान शरद पवार का है? लेकिन, पवार ने आलोचनाओं की ओर ध्यान नहीं दिया और सियासी पिच पर सधी हुई पारी खेलते हुए महाराष्ट्र की हारी बाजी को अपने पक्ष में मोड़ने में कामयाब रहे। शरद पवार ने अपने बंगले 'सिल्वर ओक' से सियासत की जोरदार बैटिंग को अंजाम दिया।

सिल्वर ओक बंगले में बनाई सियासी रणनीति

सिल्वर ओक बंगले में बनाई सियासी रणनीति

'सिल्वर ओक' एक पेड़ का नाम है, जिसके नाम पर शरद पवार के बंगले का नाम पड़ा है। इस पेड़ की खास बातों पर गौर करें इनकी लकड़ी बेहद नरम होती है। सिल्वर ओक सॉफ्ट वुड प्रजाति का है, ये बेहद कमजोर होता है। यही वजह है कि इसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों और फर्नीचर की लकड़ी के तौर पर नहीं किया जाता है। हालांकि, इसका सिल्वर ओक का इस्तेमाल स्लेट फ्रेम्स जैसे सामानों के निर्माण में किया जाता है। साथ ही पैकिंग को लेकर भी इसका इस्तेमाल होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी स्थिति में ज्यादा मजबूती की आवश्यकता नहीं होती है।

क्रिकेट बैट में इस्तेमाल होता है 'सिल्वर ओक', जानिए इसकी खूबियां

क्रिकेट बैट में इस्तेमाल होता है 'सिल्वर ओक', जानिए इसकी खूबियां

यही नहीं 'सिल्वर ओक' का इस्तेमाल और भी कई चीजों के निर्माण में होता है। खास तौर से गिटार बनाने के लिए अंदरुनी तौर पर इसका उपयोग होता है। इसके अलावा क्रिकेट के बल्ले में भी सिल्वर ओक का इस्तेमाल किया जाता है। क्रिकेट बैट के लिए पैनल बनाने में इसका जमकर प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा ये पेड़ काली मिर्च जैसे कमजोर लता पौधों की वृद्धि के लिए भी सहायता प्रदान करता है। कुल मिलाकर क्रिकेट बैट में इस्तेमाल होने वाले 'सिल्वर ओक' का कहीं न कहीं असर शरद पवार में भी देखने को मिला। यही वजह है कि उन्होंने 'सिल्वर ओक' राजनीति की धुंआधार बैटिंग की।

इसलिए शरद पवार हैं महाराष्ट्र की राजनीति के 'भीष्म पितामह'

इसलिए शरद पवार हैं महाराष्ट्र की राजनीति के 'भीष्म पितामह'

जिस तरह से महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार ने अपना दमखम दिखाया उसके बाद जानकारों की मानें उनकी बड़ी शख्सियत के चलते ही प्रदेश में उनकी पार्टी इस बड़े संकट से बाहर निकलने में कामयाब रही। वहीं कांग्रेस और शिवसेना को भी अपनी स्थिति मजबूत करने में बड़ी कामयाबी मिली है। तीनों दलों को साथ लेकर चलने और अंत तक मोर्चा संभाले रखने में शरद पवार का कद काम आया।

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