हर बच्चे के जन्म पर 100 पेड़ लगेंगे, जनसंख्या बढ़ाने के लिए क्यों प्रेरित कर रहा है ये राज्य ? जानिए
सिक्किम में आबादी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई तरह के पहले किए गए हैं। अब हर बच्चे के जन्म पर 100 पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया गया है।

जनसंख्या नियंत्रण जहां देश में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है, वहीं देश का एक छोटा सा खूबसूरत राज्य सिक्किम भी है, जो घटती जनसंख्या से परेशान है। वहां की सरकार टोटल फर्टिलिटी रेट घटने से परेशान है और तरह-तरह के पहल करने में जुटी हुई है। अब एक अभिनव अभियान छेड़ा गया है, जिसके माध्यम से लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित भी करना है और प्रकृति की सेवा का भी प्रयास किया जा रहा है। वहां की सरकार ने फैसला किया है कि हर बच्चे के जन्म पर 100 पेड़ लगाए जाएंगे। इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश जारी किए गए हैं।

'एक पेड़ लगाओ, एक विरासत छोड़ो'
सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने एक योजना लॉन्च की है, जिसके तहत इस हिमालयी राज्य में हर बच्चे के जन्म के अवसर पर 100 पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का नाम है, 'मेरो रुख मेरो संतति' (एक पेड़ लगाओ, एक विरासत छोड़ो)। प्रदेश के अधिकारियों के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य जन्म के मौके पर पेड़ लगाकर माता-पिता, बच्चों और प्रकृति के बीच संबंध को मजबूत करना है। सिक्किम के मुख्यमंत्री तमांग ने कहा, 'जैसे-जैसे बच्चे बड़े होंगे, पेड़ों को भी बढ़ते देखना, एक नवजात शिशु का स्वागत करने और इस धरती पर उनके आगमन की याद दिलाने का एक प्रतीकात्मक और बेहतर तरीका होगा। भारत में अपनr तरह की यह पहली अनोखी हरित पहल है। '

प्रकृति का सम्मान ही नहीं करते, उसे पवित्र भी मानते हैं-तमांग
गुरुवार को सिक्किम के सीएम ने कुछ नए माता-पिताओं को सांकेतिक तौर पर पौधे भी वितरित किए हैं। वन विभाग के सचिव प्रदीप कुमार ने कहा कि यह पहले प्रकृति के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा और बच्चों के जन्म पर लगाया गया पौधा पीढ़ियों के बीच में पुल का काम करेगा। सीएम तमांग ने कहा है कि सिक्किम के समाज का प्राचीन काल से प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध रहा है। उनके मुताबिक, 'हम अपने पहाड़ों, झीलों, नदियों, गुफाओं और झरनों का सिर्फ सम्मान ही नहीं करते, बल्कि संपूर्ण परिदृश्य को पवित्र मानते हैं।'

प्रकृति और इंसान दोनों की बेहतरी के लिए पहल
उन्होंने आगे कहा कि 'इस पहल का लक्ष्य हमारे समाज का प्रकृति के साथ जो संबंध रहा है, उसे और मजबूत करना है। यह एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करता है, जो पेड़ और बच्चे दोनों को सूर्य की ओर बढ़ने में सक्षम बनाता है, जिससे उनका कल बेहतर हो, जिसमें जीवन शक्ति, स्वास्थ्य और प्रसन्नता भरी हो। ' राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि इस अभियान में हर नए माता-पिता का भरपूर सहयोग करें और उन्हें इसके लिए निर्बाध सेवा प्रदान करें।

महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है
दरअसल, सिक्किम सूचना आयोग के मुताबिक राज्य की जनसंख्या करीब 6.32 लाख है। ऐसे समय में जब देश कुछ ही महीनों में आबादी के मामले में चीन को पीछे छोड़ने वाला है, सिक्किम क्षेत्र और जनसंख्या दोनों मामले में न सिर्फ सबसे छोटा राज्य है, बल्कि यहां की जनसंख्या सिकुड़ रही है। इसलिए राज्य सरकार दंपतियों और खासकर महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदान करने के लिए पहले से ही प्रेरित करने में जुटी है और अब बच्चों के जन्म पर 100 पेड़ लगाओ अभियान शुरू किया गया है। हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक तमांग ने महिला सरकारी कर्मचारियों को दूसरे बच्चे को जन्म देने पर स्पेशल इंक्रीमेंट और तीसरे बच्चे के लिए दो इंक्रीमेंट का प्रस्ताव भी दिया था।

टोटल फर्टिलिटी रेट घटने से परेशान है सिक्किम
दरअसल, सिक्किम सरकार की चिंता इस वजह से बढ़ गई है, क्योंकि आंकड़ों के हिसाब से वहां टोटल फर्टिलिटी रेट में जबर्दस्त गिरावट देखी जा रही है। पिछले करीब ढाई दशकों में TFR में 129 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। 1998-99 में यह 2.75 था जो कि 2019-20 में घटकर 1.1 रह गया(नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5)। यह माना जाता है कि आबादी को अपने स्तर पर बनाए रखने के लिए टीएफआर औसतन 2.1 तो रहना ही चाहिए। यही वजह है कि सिक्किम में आबादी में बहुत ज्यादा गिरावट का सभावित संकट नजर आ रहा है।
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सिक्किम सरकार ने सभी एजेंसियों को अभियान से जुड़ने को कहा
सिक्किम सरकार प्रदेश की संस्कृति को लेकर भी बहुत सजग है। यही वजह है कि जनसंख्या बढ़ाने की पहल को भी प्रकृति के साथ जोड़ने की पहल की है। इतना ही नहीं, पेड़ लगाने वाले अभियान में माता-पिता को जोड़े रखने के लिए आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायतों, नगर निकायों और वन विभाग के कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही साथ व्हाट्सऐप, ईमेल और वेब पोर्टल के जरिए भी नए माता-पिता से संपर्क किया जा रहा है। (इनपुट-पीटीआई)
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