Karnataka CM: 'ब्रेकफास्ट टेबल' पर क्या पक रहा था, सिद्धारमैया-DK शिवकुमार के बीच क्या हुई बातचीत
Karnataka CM Meeting: कर्नाटक में जारी सत्ता-संघर्ष के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही हुए दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद मंगलवार, 2 नवंबर की सुबह सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के आवास पहुंचे।
इस दौरान डीके शिवकुमार और उनके भाई, पूर्व सांसद डीके सुरेश ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह मीटिंग ठीक उसी समय हो रही है जब कर्नाटक कांग्रेस के भीतर CM कुर्सी को लेकर कलह तेज है। इसके बाद से ही ये चर्चा शुरु हो गई की दोनों नेताओं के बीच आखिर क्या बातचीत हुई...

ब्रेकफास्ट टेबल पर सुलझी बात?
29 नवंबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 'कावेरी' आवास पर हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद, मंगलवार, 2 नवंबर को फिर दोनों नेताओं का साथ आना राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है। इस बीच सीएम दौड़ में तीसरे दावेदार माने जा रहे राज्य के गृहमंत्री जी. परमेश्वर ने भी 'शांतिपूर्ण समाधान' की अपील की है।
कांग्रेस की आंतरिक हलचल और दोनों नेताओं के इस मुलाकात के बाद जी. परमेश्वर ने कहा, हमारे नेता फिर साथ बैठकर नाश्ता कर रहे हैं, यह अच्छी बात है। हम बस यही चाहते हैं कि जो भी हो, शांतिपूर्ण तरीके से सुलझे। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह बैठकें हाईकमान के सुझाव पर हो रही हैं और अब "अधिकांश मुद्दे सुलझ चुके हैं।" परमेश्वर ने यह भी दोहराया कि वह हमेशा मुख्यमंत्री पद की रेस में रहेंगे।
'मैं हमेशा सीएम की रेस में हूं': जी. परमेश्वर
24 नवंबर को उन्होंने कहा था 2013 में मैं केपीसीसी अध्यक्ष था और कांग्रेस को सत्ता में लाया। लेकिन चुनाव हार गया। अगर जीतता, तो क्या होता, कोई नहीं जानता। मैं हमेशा सीएम पद की रेस में रहूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में अलग-अलग नेताओं की अपनी-अपनी आकांक्षाएँ होना स्वाभाविक है और इसे गलत नहीं माना जाना चाहिए।
बहरहाल, भले ही इस बैठक में परोसे गए इडली-सांभर और उपमा को आम नाश्ता बताया गया हो, लेकिन यह मीटिंग अंदरूनी विवाद शांत करने का प्रतीक मानी गई। शिवकुमार गुट लंबे समय से '2.5 साल-पावर शेयरिंग फॉर्मूला' का हवाला देकर नेतृत्व बदलाव की मांग कर रहा है।
कर्नाटक कांग्रेस में आखिर हो क्या रहा है?
शिवकुमार समर्थक चाहते हैं कि उन्हें शेष 2.5 वर्षों के लिए मुख्यमंत्री बनाया जाए। सिद्धारमैया का दावा है कि कोई 'पावर-शेयरिंग एग्रीमेंट' नहीं था। जी. परमेश्वर खुद को तीसरा संभावित विकल्प बताते रहे हैं। हाईकमान फिलहाल दोनों बड़े नेताओं को साथ लाकर माहौल शांत करना चाह रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पिछले हफ्ते कहा था कि वह दिल्ली पहुंचकर नेतृत्व संकट पर मीटिंग बुलाएंगे। उन्होंने कहा-मैं 3-4 नेताओं को बुलाकर चर्चा करूंगा और इस अनावश्यक भ्रम को खत्म करूंगा।
कर्नाटक में सत्ता संघर्ष भले ही जारी है, पर 'नाश्ते की कूटनीति' ने फिलहाल माहौल को थोड़ा सहज कर दिया है। दोनों नेताओं की मुलाकातें संकेत देती हैं कि हाईकमान जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकता है। क्या कांग्रेस इस अन्दरूनी जंग को शांत कर पाएगी?












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