मकान मालिक भाई-बहन को अपने ही घर में 15 साल रखा कैद, ऐसी यातनाएं दीं कि कांप उठेगी रूह
बोकारो। झारखंड में एक किराएदार ने अपने मकान मालिकों को 15 साल तक कैद में रखा। पड़ोसियों से झगड़ा होने की वजह से अब जाकर जब यह राज खुला तो बंधी बनाए गए भाई-बहन को किसी तरह से बाहर निकाला जा सका। दोनों शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर हो चुके हैं। भाई दीपू घोष और बहन मंजूश्री घोष को बेकारो जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, दीपू और मंजूश्री के इलाज का इंतजाम बोकारो सेंट जेनियर्स स्टूडेंट एसोसिएशन ने किया है। दीपू घोष और मंजूश्री इसी कॉलेज से पढ़े थे। इन दोनों ने 15 साल कितनी पीड़ा सही होगी, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब पुलिस घर में घुसी तो उसने देखा कि दीपू का पैर टूटे हुए थे, जिन्हें ईंध बांधा गया था। इसी प्रकार से मंजूश्री पर जुल्म ढहाए गए। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उसके तन पर वस्त्र भी नहीं थे। पानी व बिजली कनेक्शन कटे हुए थे।

जानकारी के मुताबिक, मंजूश्री को सुबह-शाम में पॉलिथिन में फेंककर खाना दिया जाता था। टॉयलेट में पानी तक नहीं था। इतने बड़े अपने ही घर में दीपू और मंजूश्री दोनों सालों तक यातनाएं सहते रहे। अब वे इतने डरे हुए हैं कि कुछ बोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर डीके गुप्ता और क्लीनिक के संचालक मंतोष कुमार गुप्ता के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डॉक्टर डीके गुप्ता का कहना है कि वह तो संचालक के क्लीनिक मंतोष के कहने पर वहां प्रेक्टिस कर रहे थे, उन्हें नहीं पता था घर के पिछले हिस्से में क्या चल रहा था।
क्लीनिक संचालक मंतोष कुमार के बेटे ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उनके पिता का निधन हो चुका है। दीपू घोष का मकान उन्होंने ही किराए पर लिया था। लेकिन उन्हें यह नहीं पता है कि दीपू और मंजूश्री को अपने ही घर में इस प्रकार क्यों रखा गया।
मामले में किसकी क्या भूमिका है? यह बात अभी स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आ सकी है
। हां इतना जरूर साफ है कि अगर दीपू और मंजूश्री को कुछ वक्त और कैद में बिताना पड़ता तो शायद वे जीवित नहीं मिलते।












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