ISS पहुंचकर शुंभाशु शुक्‍ला ने जय हिंद, जय भारत बोलते हुए भेजा ये पहला संदेश, देखें Video

Shubhanshu Shukla Space First Message: अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और उनकी एक्सिओम-4 (Ax-4) टीम का बड़ा बड़े जोश के साथ स्‍वागत किया गया। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु अपने क्रू के साथ शाम 4:10 बजे स्पेस एक्स एक्सिओम मिशन 4 के अंतरिक्ष ड्रैगन यान से सफलतापूर्वक डॉक किया। लखनऊ के रहने वाले 39 वर्षीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ISS पहुंचने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बन गए है।

डॉकिंग के बाद, सुरक्षा जांच की प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग एक से दो घंटे लगे, जिसके बाद हैच खोला गया और शुभांशु और उनकी टीम को ISS में प्रवेश करने की अनुमति मिली।अंतरिक्ष स्टेशन पर मौजूद क्रू मेंबर्स ने नए मेंबर्स का स्वागत गले मिलकर और विशेष पेय पदार्थों के साथ किया गया।

Shubhanshu Shukla

कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचने के बाद अपना पहला संदेश भेजा है। उन्‍होंने कहा स्‍पेस के अंदर पहुंचकर उन्हें बेहतर महसूस हो रहा है और वे उन कुछ लोगों में शामिल होने के लिए सम्मानित महसूस कर रहे हैं जिन्होंने पृथ्वी को इस स्थान से देखा है।

Shubhanshu Shukla

शुभांशु बोले- मैं हूं अंतरिक्ष यात्री 634

अंतरिक्ष स्टेशन पर औपचारिक स्वागत समारोह के दौरान शुक्ला ने कहा, "मैं अंतरिक्ष यात्री 634 हूं। यहां होना एक सौभाग्य है।" उन्होंने कहा, "जिस मिनट मैंने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में प्रवेश किया और इस दल से मिला, आपने मुझे इतना स्वागत योग्य महसूस कराया, जैसे आपने सचमुच अपने घर के दरवाजे हमारे लिए खोल दिए हों।" उन्होंने आगे कहा उन कुछ लोगों में शामिल होना एक सौभाग्य है जिन्हें पृथ्वी को इस स्थान से देखने का मौका मिला है।

माइक्रोग्रैविटी पर शोध करेंगे शुभांशु शुक्ला

भारतीय वायु सेना के एक परीक्षण पायलट शुक्ला, अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय और 1984 में राकेश शर्मा के आठ दिवसीय प्रवास के बाद पहले भारतीय हैं। वह अगले 14 दिन माइक्रोग्रैविटी पर शोध करते हुए परिक्रमा प्रयोगशाला में बिताएंगे। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि आईएसएस में अगले दो सप्ताह विज्ञान और अनुसंधान को आगे बढ़ाने में अद्भुत होने वाले हैं। उन्होंने कहा, "यह सच है। यह बहुत अच्छा था। अब मुझे और भी बेहतर महसूस हो रहा है। यहां आने की जो भी उम्मीदें थीं, वे दृश्य से कहीं अधिक थीं, निश्चित रूप से, यह इसका एक बड़ा हिस्सा है।

शुभांशु शुक्‍ला ने कहा- 14 दिन अद्भुद होने वाले हैं

उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा है, यह अद्भुत है और मुझे पूरा विश्वास है कि अगले 14 दिन अद्भुत होने वाले हैं, विज्ञान और अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे और एक साथ काम करेंगे।"

Shubhanshu Shukla

अंतरिक्ष में भारत की भागीदारी का इतिहास

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम कई दशकों से चल रहा है, और इसने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। 1984 में, राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने। इसके बाद, भारत ने कई सफल उपग्रह प्रक्षेपण किए हैं, और इसने चंद्रयान और मंगलयान जैसे महत्वाकांक्षी मिशनों को भी अंजाम दिया है।

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शुभांशु शुक्ला का अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में जाना भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक और मील का पत्थर है। यह मिशन भारत को माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान में योगदान करने और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष समुदाय के साथ सहयोग करने का अवसर प्रदान करेगा।

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