शुभांशु शुक्ला के नाम संसद का सत्र! ISS यात्रा पर हुई चर्चा, आज शाम होगी पीएम मोदी से मुलाकात
Shubhanshu Shukla: भारत का सपना था कि उसके अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक जाएं और दुनिया को दिखाएं कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान में किसी से पीछे नहीं है। चार दशक बाद यह सपना ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने पूरा किया। भारतीय वायुसेना के इस जांबाज़ पायलट ने Axiom-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचकर इतिहास रच दिया।
अब संसद में इस उपलब्धि पर विशेष चर्चा हो रही है, जिसे "ISS पर भारत का पहला अंतरिक्ष यात्री - 2047 तक Viksit Bharat: अंतरिक्ष कार्यक्रम की भूमिका" नाम दिया गया है। यह चर्चा केवल एक मिशन की नहीं, बल्कि भारत के उस भविष्य की झलक है जहां गगनयान और स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन जैसे बड़े सपने पूरे होते दिख रहे हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ने दी बधाई
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संसद की ओर से शुभांशु शुक्ला को बधाई दी। शुक्ल ने Axiom-4 मिशन के तहत ISS की यात्रा कर भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय जोड़ा।
ये भी पढ़ें: शुभांशु शुक्ला को PM मोदी का सलाम! लाल किले से बताया 'विकसित भारत' का प्लान, होगा अपना स्पेस स्टेशन
लोकसभा अध्यक्ष @ombirlakota ने सदन की ओर से भारतीय वायु सेना के परीक्षण पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को हार्दिक बधाई दी, जिन्होंने एक्सिओम मिशन-4 के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रच दिया।@isro @DrJitendraSingh pic.twitter.com/5MfCnlRQ5l
— SansadTV (@sansad_tv) August 18, 2025
लोकसभा में अंतरिक्ष मिशन पर विशेष चर्चा
लोकसभा में आज भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के ऐतिहासिक ISS मिशन पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दस वर्षों में अंतरिक्ष विभाग और स्पेस टेक्नोलॉजी ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी अंतरिक्ष तकनीक का अहम योगदान रहा, और यह प्रगति मोदी सरकार के आने के बाद तेज़ हुई।
मंत्री ने सवाल उठाया कि आखिर 60-70 साल तक अंतरिक्ष विभाग क्यों अलग-थलग रहा और धीमी गति से काम करता रहा। उन्होंने कहा कि 26 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार संभाला, तभी से अंतरिक्ष यात्रा का एक नया अध्याय शुरू हुआ और इसमें ताकत व रफ़्तार दोनों आईं।
देश में घर वापसी पर हुआ भव्य स्वागत
शुभांशु शुक्ला रविवार सुबह दिल्ली एयरपोर्ट लौटे और उनका स्वागत जोरदार अंदाज़ में किया गया। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और इसरो प्रमुख वी. नारायणन सहित कई गणमान्य लोग एयरपोर्ट पर मौजूद थे। बैंड बाजा, फूलवर्षा और तिरंगे के साथ उनका स्वागत किया गया।
PM से मुलाकात और राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस में शिरकत
शुक्ला आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर मिलने वाले हैं। इसके बाद वे 22-23 अगस्त को होने वाले "राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस" समारोह में हिस्सा लेंगे जहां वे अपने अनुभव साझा करेंगे।
लखनऊ का लाल बना लोगों के लिए प्रेरणा
शुभांशु शुक्ला लखनऊ के निवासी हैं, और उनके इस ऐतिहासिक मिशन ने पूरे उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह भारत की विज्ञान प्रगति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मिसाल है।
Axiom-4 मिशन की अहमियत और वैज्ञानिक उपलब्धियां
शुभांशु शुक्ला Axiom-4 मिशन के दौरान मिशन पायलट थे। यह मिशन 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसX रॉकेट के जरिए लॉन्च हुआ और 26 जून को ISS से जुड़ा। मिशन 18 दिन तक चला और 15 जुलाई को प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग हुई।
इस दौरान उन्होंने करीब 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए जिनमें से 7 भारत से जुड़े थे। इनमें माइक्रोग्रैविटी में स्क्रीन के प्रभावों का अध्ययन, सूक्ष्मजीवों की अनुकूलन क्षमता, मांसपेशियों पर असर और कृषि उत्पादकता से जुड़े प्रयोग शामिल थे।
मिशन पर खर्च
इस मिशन पर लगभग 550 करोड़ रुपये का खर्च आया जिसमें प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और वैज्ञानिक गतिविधियां शामिल थीं। खास बात यह रही कि शुभांशु शुक्ला को इस मिशन के लिए कोई वेतन नहीं मिला। उनकी यह यात्रा पूरी तरह समर्पण और देश के भविष्य के लिए की गई थी।
भारत का अंतरिक्ष भविष्य
Axiom-4 मिशन से मिले अनुभव ने भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान "गगनयान" की राह आसान की है, जिसे 2027 तक लॉन्च करने की योजना है। इसके अलावा भारत स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है।
ये भी पढ़ें: लोकसभा में पेश हुआ नया Income Tax Bill 2025 का ड्राफ्ट, टैक्सपेयर्स को मिल सकती हैं ये बड़ी राहतें












Click it and Unblock the Notifications