Shivsena Dussehra rally: दरकिनार हुई एकनाथ शिंदे टीम, क्यों ठाकरे गुट और भाजपा आए आमने-सामने
Shivsena Dussehra rally: दरकिनार हुई एकनाथ शिंदे टीम, क्यों ठाकरे गुट और भाजपा आए आमने-सामने
मुंबई, 04 सितंबर: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में दशहरे का आयोजन इस बार उद्धव ठाकरे गुट और एकनाथ शिंदे गुट के लिए प्रतिष्ठा का प्रतीक बना हुआ है। दोनों गुट दशहरे के दिन 5 अक्टूबर को अपना दम खम दिखाते हुए शक्ति प्रदर्शन करेंगे लेकिन अब दशहरे के मौके पर अब लड़ाई भाजपा बनाम उद्धव ठाकरे होती नजर आ रही है। बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना जिसमें दो फाड़ होने की वजह से शिवसैनिक एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाकर जो भाजपा महाराष्ट्र की सत्ता में साझेदार बन चुकी है वो अब शिवसेना के इन दो गुटों की लड़ाई में फ्रंट लेती क्यों नजर आ रही आइए जानते हैं ?

शिवसेना के दोनों गुट दिखाएंगे अपनी ताकत
बता दें महाराष्ट्र मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे दोनों ने शिवाजी पार्क में दशहरा रैली के लिए नगर निगम को आवेदन भेजा था। जिसमें ठाकरे गुट की जीत हुई और नगर निमम से परमीशन मिलने के बाद उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना दशहरा रैली आयोजन स्थल मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क पर कर रही है, जहां हर साल वो अपना पाारंपरिक दशहरा आयोजन करती आ रही है। वहीं एकनाथ शिंदे गुट मुंबई में मातोश्री के नजदीक ब्रांद्रा कुर्ला कॉम्पलेक्स स्थित एमएमआरडीए मैदान में दशहरें का आयोजन कर रैली करेंगे। इस अवसर पर दोनों ही गुट अपना दम खम दिखाने के लिए हजारों की भीड़ जुटाने में जुटे हुए हैं। वहीं दशहरे के लिए आयोजित इस आयोजन से अलग हटकर भाजपा अपनी अलग ही खिचड़ी पका रही है।

जानें भाजपा का क्या है उद्देश्य
गौरतलब है कि बृहद मुंबई महानगर पालिका (BMC)जिसका 40,000 करोड़ रुपये का बजट रहता है। उस नगर निगम का चुनाव पिछले 20 सालों से शिवसेना ही जीतती आ रही है। वहीं अब महाराष्ट्र सत्ता में साझीदार बनने के बाद भाजपा की निगाह इस चुनाव पर टिकी हुई हैं। हालांकि चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है लेकिन भाजपा उसके लिए बनाई रणनीति पर काम करना शुरू कर चुकी है। ये दशहरे के आयोजन को भाजपा एक बड़े मौके के तौर पर देख रही है। वो हर हाल में ठाकरे गुट को आगामी नगर निगम चुनाव में परास्त करने की रणनीति बना चुकी है।

अमित शाह ने "उद्धव ठाकरे को सबक सिखाने" का आह्वान किया है
भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने 5 सितंबर को ही मोटी रकम खर्च करके इसकी शुरूआत कर दी थी। भाजपा के आक्रामक अभियान की शुरुआत की और राजधानी में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और अमित शाह ने उन्हें "उद्धव ठाकरे को सबक सिखाने" का आह्वान किया।

भाजपा ने चुनाव को टॉरगेट करने के लिए किए ये आयोजन
गौरतलब है कि एकनाथ शिंदे ने अभी तक अपने डिप्टी देवेंद्र फडणवीस और अन्य को महाराष्ट्र बीजेपी में अपने कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया है। वहीं जानकारों का कहना है कि भाजपा इन दोनों की लड़ाई में नहीं पड़ने वाली। वो स्वयं को दोनों गुटों से अलग रखकर बीएमसी चुनाव को टारगेट करते हुए अपनी चुनावी रणनीति पर काम कर रही है। उद्धव ठाकरे को आयोजन तो करने दे रही लेकिन भाजपा ने मराठी वोट से जुड़ने के लिए गायक अवधूत गुप्ते के साथ "मराठी गरबा" शुरू किया है, उसके बाद रणबीर सिंह का डांडिया स्टेज शो। बीजेपी ने महत्वपूर्ण बीएमसी चुनावों के लिए ऐसे कई बृहद आयोजनों की योजना बनाई है। जिससे जिन मराठियों को ठाकरे की शिवसेना अपना कोर वोटर मानती है उन्हें अपने पक्ष में कर सके। इस नगर निगम चुनाव के साथ भाजपा का फोकस 2024 के लोकसभा चुनाव हैं।
भाजपा की रणनीति
याद रहे बीजेपी राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत बनाने के लिए कई महानगरों में नगर निगम को टॉरेगेट कर चुकी है। याद रहे वर्ष 2020 में हैदराबाद निकाय चुनाव में भाजपा ने योगी आदित्यनाथ, अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे शीर्ष नेताओं को हैदराबाद निकाय चुनाव में प्रचार के लिए उतारा था। जिसका उद्देश्य तेलंगाना में पैर जमाना था। स्थानीय चुनावों का उपयोग करके वो तेलंगाना में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती थी। वहीं अब भाजपा मुंबई में नगर निगम चुनाव (बीएमसी) के लिए अपने अभियान को बढ़ा रही है। गणेश चतुर्थी पर अमित शाह का कार्यक्रम इसी का उदाहरण है।
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