अमित शाह के जवाबी हमले के बाद शिवसेना नेताओं के मुंह हुए बंद!

बेंगलुरू। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में स्पष्ट जनादेश के बाद भी महाराष्ट्र की सत्ता से बाहर हुई बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना को आड़ों लेकर जता दिया है कि अब तक एनडीए सहयोगी रही शिवसेना उसके लिए महाराष्ट्र की राजनीति में अब इतिहास बन चुकी है। हालांकि राजनीति में यह कहावत मशहूर है कि कुर्सी की राजनीति में कोई ज्यादा दिन तक सगा और दुश्मन रह सकता है।

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करीब 18 दिनों बाद बीजेपी अध्यक्ष शाह की चुप्पी बुधवार को एक इंटरव्यू में टूटी। एक सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन सरकार नहीं बनने के पीछे शिवसेना अस्वीकार्य शर्ते थीं। जिसकी वजह से एनडीए की सरकार महाराष्ट्र में नहीं बन सकी। शाह के मुताबिक चुनावी कैंपेन के दौरान बीजेपी ने 100 से अधिक बार कहा कि एनडीए गठबंधन चुनाव जीती तो देवेंद्र फडणवीस ही होंगे मुख्यमंत्री, लेकिन किसी ने तब विरोध नहीं जताया और नतीजों के बाद अब कोरी राजनीति की जा रही है।

गौरतलब है शिवसेना नेता व प्रवक्ता संजय रावत ने दिए एक बयान में दावा किया था कि चुनाव पूर्व एक बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान शिवसेना औप बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बीच महाराष्ट्र में 50-50 फार्मूले पर बात हुई थी, लेकिन शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह बात नहीं बताई। शाह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजेपी में ऐसे संस्कार नहीं है कि बंद कमरे की गई बातचीत को सार्वजनिक किया जाए।

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शाह ने महाराष्ट्र में सरकार नहीं पाने के लिए चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना की अस्वीकार्य मांगों को जिम्मेदार ठहराते हुए शिवसेना के झूठे दावों को मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना दवाब की राजनीति कर रही है। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में भी बीजेपी शिवसेना की किसी भी मांग को नहीं मानेगी। शिवसेना के रवैये को शाह ने महाराष्ट्र की केयर टेकर सरकार के लिए नुकसान बताया।

अमित शाह के पलटवार के बाद शिवसेना नेताओं में खामोशी दर्शाती है कि दाल में जरूर कुछ काला है, क्योंकि अभी तक एनडीए सरकार शामिल नहीं होने के वजहों पर दहाड़ने वाले शिवसैनिक अमित शाह के जवाबों पर कोई कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे शिवसेना के उन दावों की पोल खुलती नजर आ रही है, जिसको आधार बनाकर शिवसेना बीजेपी पर पिछले 18 दिनों से हमला कर रही थी।

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अब चूंकि महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग चुका है और बीजेपी को छोड़कर सभी दल गठबंधन सरकार की कवायद में मीटिंग दर मीटिंग कर रही है। एनसीपी- शिवसेना और एनसीपी और कांग्रेस महाराष्ट्र में सरकार गठन की तैयारियों को लेकर लगातार मीटिंग कर रही है, लेकिन अभी कोई दल किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि अगर तीनों दल एक साथ गठबंधन सरकार चलाने के लिए तैयार भी जाते हैं तो सरकार का स्वरूप क्या होगा।

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अमित शाह ने शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस को चुनौती दी है कि उनके पास अभी 6 महीने का वक्त है और अगर संख्याबल जुटाने में कामयाब होते हैं तो जब चाहे राज्यपाल के सामने सरकार गठन का दावा पेश कर सकते हैं। शाह ने कहा कि महाराष्ट्र चुनाव से पहले किसी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को इतना वक्त नहीं दिया गया था, लेकिन शिवसेना समेत सभी दलों को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पर्याप्त 18 दिन दिए।

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बड़ी बात यह है कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने के लिए न्योता दिया था, लेकिन दोनों मे से कोई भी दल सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर सका, क्योंकि दोनों दलों के पास पर्याप्त संख्याबल मौजूद नहीं था और मजबूरन राज्यपाल को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी पड़ी।

हालांकि शिवसेना ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राजनीति में घेरते हुए उन पर आरोप लगाया कि शिवसेना को पर्याप्त समय नहीं दिया दिया। शिवसेना के मुताबिक राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार गठन के लिए 48 घंटे का समय दिया, लेकिन उसे महज 24 घंटे को समय दिया गया। शिवसेना के आरोपों को शाह ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि विपक्ष केवल राजनीति कर रही है, क्योंकि उनके पास संख्याबल नहीं है।

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बकौल अमित शाह, अगर तीनों दलों के पास संख्याबल होते तो वो अब सरकार गठन का प्रस्ताव पेश कर चुके होते। उन्होंने संवैधानिक पद पर बैठे राज्यपाल को राजनीति में जबरन घसीटने की कोशिश की, जो लोकतंत्र में एक गलत परंपरा है। विपक्ष को लगता है कि ऐसी भ्रांतियां फैलाकर अगर उन्हें जनता की सहानुभूति मिल जाएगी, तो यह उनकी बड़ी भूल है।

उल्लेखनीय है अमित शाह के पलटवार को अब तक लगभग 18 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन शिवसेना की ओर अपनी डिफेंस में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। हो सकता है इस संबंध में शुक्रवार को प्रकाशित होने वाले शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में लेख आ जाए।

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लेकिन शिवसेना की चुप्पी इशारा करती है कि शिवसेना कही न कहीं दवाब की राजनीति कर रही थी, लेकिन इस बार उसका दांव उल्टा पड़ गया, क्योंकि जिस 50-50 फार्मूले को आधार बनाकर शिवसेना बीजेपी को झूठा और अहंकार साबित करनी पर तुली हुई थी, अब अमित शाह के पलटवार के बाद उसके पास कोई जवाब नहीं बचा है।

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निः संदेह शिवसेना बीजेपी के महाराष्ट्र में बढ़ते प्रभाव से घबराई हुई है और एक झूठ के सहारे बीजेपी को बदनाम करके मराठा वोटरों को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही है। यह बीजेपी के महाराष्ट्र में बढ़ते कद का ही असर है कि शिवसेना का ग्राफ मराठियों के बीच भी लगातार गिर रहा है।

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शिवसेना अब एनसीपी और कांग्रेस के सहारे महाराष्ट्र की सत्ता में बैठने के सपने बुन रही है,लेकिन वह भूल गई है कि मुख्यमंत्री पद के लिए उसे एनसीपी और कांग्रेस के साथ भी समझौता करना पड़ सकता है। एनसीपी और कांग्रेस ने शिवसेना को उसका ही 50-50 फार्मूले टिका दिया है, जिससे पूरे पांच वर्ष कार्यकाल वाले शिवसेना के मुख्यमंत्री वाले सपने को पलीता लगना तय है।

यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र में लगातार सिकुड़ते जनाधार के चलते बीजेपी से अलग हुई शिवसेना!

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