शिवसेना सिर्फ मलाईदार पोर्टफोलियो के लिए बीजेपी को हूल दे रही है!

बेंगलुरू। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में एनडीए गठबंधन का सरकार बनना तय है। एनडीए पार्टनर शिवसेना 50-50 फार्मूले के तहत बीजेपी पर दवाब बनाने के लिए नेशनल कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी के साथ राजनीतिक चूहे और बिल्ली का खेल इसलिए खेल रही है ताकि उसको मलाईदार पोर्टफोलियो वाली मिनिस्ट्री उसके खाते में आ जाए।

Shiv sena

क्योंकि शिव सेना खुद भी जानती है कि बीजेपी कभी भी 50-50 फार्मूले पर तैयार नहीं होगी। बीजेपी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 से पूर्व शिवसेना द्वारा मांगे सीटों पर जब तैयार नहीं हुई तो वह बीजेपी उसके राजनीतिक चोचलेबाजी में फंसेगी, इसकी संभावना नहीं दीखती है।

गौरतलब है बीजेपी और शिवसेना की गठबंधन में एनडीए ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में कुल 162 सीटें जीती हैं। बीजेपी कुल 162 सीटों पर लड़ी थी और उसको 105 सीटें हासिल हुई हैं जबकि 126 सीटों उम्मीदवार उतारने वलाी शिवसेना को महज 56 सीटें ही हासिल हुईं हैं।

Shiv sena

पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग चुनाव में उतरे थे तब बीजेपी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन करते हुए 122 सीटों पर जीत दर्ज कर की थी जबकि 282 सीटों पर उम्मीदवार उतारने वाली शिवसेना को महज 62 सीटों पर जीत पाई थी। हालांकि नतीजे के बाद दोनों दलों सरकार में शामिल हुईं और तमाम बयानों के बाद दोनों दलों पूरा टर्म भी सफलतापूर्वक पूरा किया।

आंकड़ों को देखें तो बीजेपी की तुलना में बीजेपी का आधार मजबूत है। वर्ष 2014 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करेंगे तो पाएंगे कि बीजेपी ने 262 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और 122 सीटों पर जीत मिली थी, लेकिन शिवसेना 282 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद महज 62 सीटों पर जीत मिली थी।

वर्ष 2014 विधानसभा चुनाव में दोनों दलों को मिले मत औसत भी बीजेपी को शिवसेना का बड़ा भाई ठहराती है, लेकिन शिवसेना है कि मानती नहीं है। ताजा नतीजों में भी शिवसेना बीजेपी की तुलना में पिछली नजर आती है जबकि दोनों दलों ने गठबंधन किया था।

2019 विधानसभा चुनाव नतीजों के मुताबिक बीजेपी 162 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और उसने कुल 105 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि 126 सीटों पर लड़ने वाली शिवसेना महज 56 सीटों पर सिमट गई है। दोनों दलों के मिले मत औसत में भी बड़ी असमानता है। बीजेपी को जहां 27.8 फीसदी वोट मिले हैं, लेकिन शिवसेना का मत फीसदी महज 19.3 फीसदी है। शिवसेना और बीजेपी को पिछले विधान सभा चुनाव की तुलना में करीब 23 सीटों का नुकसान हुआ है।

Shiv sena

हालांकि इसमें लड़ी गई सीटों के हिसाब से बीजेपी की जीत का औसत शिवसेना से बेहतर है। बीजेपी 162 सीटों पर लड़कर 105 सीट जीतती है, उसकी जीत का औसत 65 फीसदी है, लेकिन शिवसेना 126 सीटों पर लड़ती है, लेकिन 56 सीट पर विजयी होती है। शिवसेना द्वारा लड़ी गई सीटों पर उसकी जीत का औसत महज 45 फीसदी है। तो किस आधार पर शिवसेना 50-50 फार्मूले की बात कर रही है यह समझ से परे हैं।

शिवसेना ने चुनाव नतीजों के बाद एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की जमकर तारीफ की और बदले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सरकार में शिवसेना के 50-50 फार्मूले का समर्थन कर दिया। शिवसेना बीजेपी को यह इशारा देना चाहती है कि बीजेपी अगर 50-50 फार्मूले पर नहीं मानीं तो वह एनसीपी का दरवाजा खटखटा सकती है, लेकिन बहुमत कहां से जुटाएगी शिवसेना यह बड़ा सवाल है।

शिवसेना यह भूल गई है कि एनसीपी के अकेले आ जाने से शिवसेना महाराष्ट्र में सरकार बनाने लायक बहुमत नहीं जुटा पाएगी। इसके लिए उसे कांग्रेस को साथ लेना होगा, जो कि शिवसेना के लिए नामुमकिन कहा जा सकता है, क्योंकि शिवसेना और कांग्रेस की जोड़ी बहुत ही बेमेल जोड़ी है। इसके लिए एक कांग्रेस भी तैयार नहीं होती दिखेगी।

Shiv sena

शिवसेना एनसीपी के साथ आ सकती है, लेकिन शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने के लिए 144 का आकंड़ा जुटाना पड़ेगा, जोकि दूर की कौड़ी है। अगर शिवसेना और एनसीपी 23 निर्दलीय का समर्थन लेने में कामयाब भी होती हैं तभी भी उसे जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए 11 विधायकों की जरूरत होगी।

हालांकि यह संभव है अगर एनसीपी और शिवसेना की गठबंधन सरकार की सुगबुगाहट के बीच 11 कांग्रेसी विधायक टूटकर उनकी संभावित सरकार में शामिल हो जाएं। शिवसेना किसी और तरीके से कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने में अक्षम है, क्योंकि कट्टर हिंदूवादी राजनीति और राष्ट्रवाद की पैरोकार वाली पार्टी शिवसेना लगातार कांग्रेस के खिलाफ बयानबाजी करती रही है। कम शब्दों में कहें तो शिवसेना की राजनीति में धुरी कांग्रेस ही है।

Shiv sena

याद कीजिए, मोदी सरकार ने गत 5 अगस्त को जब जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटा दिया था तब कांग्रेस सरकार के फैसले पर एतराज जताया था। शिवसेना तब भी कांग्रेस के खिलाफ खड़ी हुई थी और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में जनता से वोट मांगने के दौरान चुनावी कैंपेन में राष्ट्रवाद मुद्दे पर कांग्रेस को जमकर घेरा था।

Shiv sena

चुनावी कैंपेन के दौरान शिवसेना नेताओं के बोल थे, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के विरोध में खड़ी कांग्रेस को कौन वोट देगा। स्पष्ट है कि शिवसेना केंद्र में सत्तासीन बीजेपी सरकार के कदम का समर्थन कर रही है जबकि कांग्रेस अभी तक जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले पर बंटी हुई है, जिसका खामियाजा उसके महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में मिला है।

Shiv sena

शिवसेना चाहकर भी कांग्रेस के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार में शामिल नहीं हो सकती है वरना उनकी पूरी राजनीत को बट्टा लग जाएगा। हिंदूत्व, राष्ट्रवाद और अयोध्या मंदिर के नाम पर चुनाव की वैतरणी पार करने वाली शिवसेना की दाल नहीं गलने वाली है। यह पूर्व शिवसेना अध्यक्ष बालासाहब ठाकरे के समय से चला रहा है और उद्धव ठाकरे पार्टी के मूल सिद्धांतों से इतर जाकर कुछ नहीं करने वाले हैं।

Shiv sena

उल्लेखनीय है कांग्रेस के साथ खड़े होकर शिवसेना अपना जनाधार ही नहीं खोएगी, बल्कि उसके अस्तित्व पर भी संकट आ जाएगा। क्योंकि राष्ट्रवाद, हिदुत्व और अयोध्या मंदिर की लंबरदार बीजेपी ही मानी जाती है और अगर शिवसेना कांग्रेस की गोद में बैठने की सोचती है, तो उसके वोटर्स खिसककर बीजेपी के पास चले जाएंगे।

यह भी पढ़ें- पिछले स्कोर की बराबरी में भी क्यों चूक गयीं भाजपा –शिवसेना?

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+