Sharda Sinha: छठ गीत की पर्याय, छठ पूजा से पहले विदा, कौन हैं बिहार की स्वर कोकिला शारदा सिन्हा
भारत में संगीत जगत का एक चिराग बुझ गया। पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे भारत के बडे सम्मान से पुरस्कृत बिहार स्वर कोकिला के नाम जानी जाने वाली शारदा सिन्हा (Sharda Sinha)ने अब दुनिया को अलविदा कर दिया है।खासकर छठ पर्व की शुरुआत से ठीक पर पहले उनका निधन बिहार समेत पूरे पूर्वांचल और देश अन्य कोनों में उनके समर्थकों को झकझोर देने वाला है। अपने सुरों ने सभी को मंत्रमुग्ध करने वाली लोकगायिका भले ही अब हमारे बीच नहीं रहीं लेकिन वे अपने मधुर गीतों के जरिए भारतवासियों के दिलों में हमेशा के लिए बस गईं है।
शारदा सिन्हा अपने गीतों के लिए आगे वाले कई शदियों तक याद की जाती रहेंगी। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल में जन्मी शारदा सिन्हा को बिहार कोकिला नाम से जानी जाती थीं। उन्होंने अधिकतर गाने मैथिली और भोजपुरी भाषा में गए। छठ गीत की गायिका शारदा सिन्हा का स्वास्थ्य मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन के चलते बेहद खराब था। उन्हें एम्स दिल्ली में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। उनका ऑक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। जिसके चलते 5 नवंबर 2024 की रात उनका निधन हो गया।

शारदा सिन्हा ने संगीत में पीएचडी की भी डिग्री हासिल की थी। उन्होंने बीएड का कोर्स किया था। वे मगध महिला कॉलेज, प्रयाग संगीत समिति और ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी में हुई थी। शारदा सिन्हा की गायन कला सिर्फ लोकगीतों तक ही सीमित नहीं थी। उन्होंने भोजपुरी के अलावा बॉलीवुड की कई मशहूर फिल्मों में अपनी आवाज दी थी। सिन्हा ने 'मैंने प्यार किया फिल्म' में 'कहे तोसे सजना' और हम आपके हैं कौन फिल्म का 'बाबुल' गाने में अपनी आवाज दी।
बिहार स्वर कोकिला के नाम कई सम्मान
बिहार की स्वर कोकिला के नाम से फेमस शारदा सिन्हा जी को कई बड़े पुरस्कार मिले। वर्ष 1991 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2018 में सिन्हा को पद्म भूषण सम्मान दिया गया। इसके अलावा शारदा सिन्हा को 'भिखारी ठाकुर सम्मान', 'बिहार गौरव', 'बिहार रत्न' और 'मिथिला विभूति' जैसे कई पुरस्कारों से सम्नानित किया गया। इसके अलावा शारदा सिन्हा को 'बिहार कोकिला' और 'भोजपुरी कोकिला' जैसे अन्य कई पुरस्कार भी मिले।












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