बाल वेश्यावृति को रोकने के लिए बीजेपी नेता शायना एनसी ने की ये मांग
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित करते हुए इस याचिका में 14 वर्षीय रती ( बदला हुआ नाम) की कहानी को बयां किया है।
नई दिल्ली। भारत में सेक्स इंडस्ट्री हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ रही है। मुंबई देश की सबसे बड़ी सेक्स इंडस्ट्री तो है ही, यह एशिया की भी सबसे बड़ी सेक्स इंडस्ट्री है। मुंबई में ही एक बार फिर से बाल वेश्यावृति का गंदा चेहरा सामने आया है। खुलासे के मुताबिक एक नाबालिग बच्ची को एक दिन में 30 लोगों के साथ सोने पर मजबूर किया जाता था। बीजेपी प्रवक्ता शायना एनसी ने नाबालिग बच्चियों से वेश्यावृति कराने वाले लोगों को गिरफ्तार कराने के लिए change.org मुहिम शुरू की है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित करते हुए इस याचिका में 14 वर्षीय रती ( बदला हुआ नाम) की कहानी को बयां किया है। जो बाल तस्करी की शिकार हुई थी। जिसे मुंबई के वेश्यालय में ग्राहकों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए रखा गया था। इस नाबालिग को बड़ी दिखने के लिए हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते थे और कई बार एक दिन में 30 पुरुषों के साथ सोने को मजबूर किया गया था। शायना एनसी ने बताया है कि जब पुलिस ने वेश्यालय पर छापा मारा तब प्रबंधकों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जो ग्राहक लड़की के साथ यौन संबंध रखने वाले थे, उन्हें चेतावनी के साथ छोड़ दिया गया था।
याचिका में मुख्यमंत्री फडणवीस से कहा गया है कि वे ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने के लिए राज्य पुलिस विभाग और मानव-मानव तस्करी यूनिटों को निर्देशित करें, जो यौन शोषण करते हैं।याचिका में कहा गया है इस मामले में वेश्यालय के मालिकों और तस्करों को गिरफ्तार करने से समस्या का हल नहीं होने वाला है। यह एक संगठित अपराध है हमें मकोका जैसे सख्त कानूनों के तहत ग्राहकों को भी गिरफ्तार करना होगा। वेश्यालय में आने वाले ग्राहको को जमानत नहीं मिल सकें इसके लिए भी कोशिश करनी होगी।आपको बता दें कि महाराष्ट्र एंटी मानव तस्करी यूनिट ने 2011 में 78 वेश्यालय बंद कर दिए थे।
एक आरटीआई की सुनवाई करते हुए 2010 में सुप्रीम कोर्ट को सरकार की तरफ से बताया गया था कि हर रोज इस देश में 200 महिलाओं को देह व्यापार के धंधे में धकेला जाता है। इसमें में बीस फीसदी लड़कियां 15 साल से कम उम्र की होती हैं। यानि हर रोज तकरबीन 40 नाबालिग लड़कियां देह व्यापार के धंधे में धकेली जाती हैं। सरकार जिस रिसर्च का हवाला दे रही थी उसी में ये भी कहा गया था कि पिछले दस सालों में नाबालिग लड़कियों की औसत उम्र 14 से 16 साल घटकर, 10 से 14 साल तक पहुंच गई है।यानि देह के सौदागर बेहद कम उम्र के बच्चों को नर्क में बेरहमी से धकेल रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में सरकार से बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध को लेकर सख्त कानून बनाने को कहा। अदालत ने ये भी कहा बाल वेश्यावृति में लिप्त बच्चों से उत्पीड़न करनेवाले आरोपियों पर बलात्कार का भी मुकदमा चलाया जा सकता है। लेकिन सरकार हर बार इस तरफ से उदासीन ही दिखी।












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